कड़कड़ाती धूप और पसीने की कमाई लेकर मंडी पहुंचने वाले किसानों के लिए इस बार प्रशासन सख्त है। जनपद के 63 गेहूं क्रय केंद्रों पर अब केवल फसल की तौल नहीं होगी, बल्कि किसानों के मान-सम्मान का भी ख्याल रखा जाएगा। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि अगर किसी भी केंद्र पर किसान के साथ दुर्व्यवहार हुआ या लापरवाही बरती गई, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। छाया और पानी के बिना नहीं चलेगा काम नवीन सभागार में हुई समीक्षा बैठक में निर्देश दिए गए हैं कि केंद्रों पर इंतजाम पुख्ता होने चाहिए। अप्रैल की तपती गर्मी को देखते हुए सभी 63 केंद्रों पर किसानों के बैठने के लिए छायादार जगह और ठंडे पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। मकसद साफ है कि अपनी उपज बेचने आए किसान को घंटों लाइन में लगकर परेशान न होना पड़े। रजिस्टर में दर्ज करनी होगी मौजूदगी केंद्र प्रभारियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए ‘मूवमेंट रजिस्टर’ का नियम कड़ा कर दिया गया है। अगर कोई प्रभारी केंद्र पर मौजूद नहीं मिलता, तो उसे रजिस्टर में कारण दर्ज करना होगा। लापरवाही पकड़े जाने पर कठोर कार्रवाई तय है। जिलाधिकारी खुद इन केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि धरातल पर व्यवस्थाओं की पोल न खुले। छोटे किसानों को मिलेगी प्राथमिकता अक्सर देखा जाता है कि बड़े रसूखदारों के चक्कर में छोटे किसान पीछे छूट जाते हैं। इस बार नियम बदल दिया गया है। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि छोटे और सीमांत किसानों को गेहूं खरीद में प्राथमिकता दी जाए। बिचौलियों के दखल को पूरी तरह खत्म करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585रु प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा। पारदर्शिता पर रहेगा जोर
प्रशासन का मानना है कि किसान बेहद कठिन परिस्थितियों में फसल तैयार करता है, इसलिए उसकी उपज की खरीद सरल और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए। एडीएम आपूर्ति और डिप्टी आरएमओ को पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने को कहा गया है। किसी भी तरह की भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए कंट्रोल रूम को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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