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गेमिंग एप से फंसाते थे किडनी डोनर:हारने पर देते थे लोन; कानपुर के डॉक्टर समझाते- एक किडनी वाले लंबा जीते हैं


                 गेमिंग एप से फंसाते थे किडनी डोनर:हारने पर देते थे लोन; कानपुर के डॉक्टर समझाते- एक किडनी वाले लंबा जीते हैं

गेमिंग एप से फंसाते थे किडनी डोनर:हारने पर देते थे लोन; कानपुर के डॉक्टर समझाते- एक किडनी वाले लंबा जीते हैं

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर को गेमिंग ऐप से फंसाया जाता था। इस पर रुपए हारने के बाद लड़कों को किडनी डोनेट करने के लिए मजबूर किया जाता था। इसके बदले उन्हें 20 से 25 लाख रुपए देने का वादा किया जाता था। मना करने पर लड़कों को अमेरिका और लंदन की रिसर्च भेजी जाती। इनमें ऐसे लोगों का जिक्र होता था, जो एक किडनी के साथ पैदा हुए और अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने के बाद इन लड़कों की किडनी डोनेट करा ली जाती थी। इसी पैटर्न पर आयुष की किडनी भी निकाली गई। उसका एक म्यूल बैंक अकाउंट (ऐसे खाते, जो साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं) दिल्ली के बैंक में खोला गया था। कानपुर पुलिस उसकी जांच कर रही है कि ट्रांजेक्शन कहां-कहां हुए हैं? वहीं, आज जेल में बंद एजेंट शिवम अग्रवाल के बयान दर्ज कराए जाएंगे। किडनी डोनर लाने की पूरी कहानी इस रिपोर्ट में पढ़िए… अब डोनर फंसाने का पैटर्न समझिए कानपुर में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट हुईं
किडनी ट्रांसप्लांट केस में पुलिस डॉक्टरों की छानबीन कर रही है। डॉक्टर और OT टेक्निशियन समेत 9 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। 6 और चेहरे सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। अब तक की छानबीन में सिर्फ कानपुर में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट के केस सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठा कि डोनर कैसे और कहां से लाए जा रहे? पुलिस ने इस बारे में डोनर आयुष से पूछताछ की। उसके मोबाइल की डिटेल से कई चौंकाने वाली डिटेल सामने आईं। 2 डॉक्टर टेलीग्राम पर भेजते थे गेम के लिंक
अब तक की जांच में सामने आया कि डॉक्टर और उनकी टीम ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर ग्रुप बना रखे थे। इनको डॉ. अफजल और डॉ. मुदस्सिर अली चलाते थे। ये ग्रुप गेमिंग के थे, इनमें टास्क वाले गेम के लिंक भेजे जाते थे। लॉग-इन करने पर प्लेयर को अपना अकाउंट बनाना होता था। इसमें हर प्लेयर को बोनस फंड देकर खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। प्लेयर को पहले आसान टास्क देकर जीतने दिया जाता था। शुरुआत में जीती गई रकम उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती थी। फिर हर स्टेज पर गेम मुश्किल होता जाता था। जीतने के चक्कर में लोग टास्क पूरे करते जाते थे। हर स्टेज के साथ बड़ी रकम लगानी होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे लोग हारने लगते। बीच-बीच में उनकी स्क्रीन पर रकम उधार लेने के लिए मैसेज भेजे जाते। लोग बड़ी रकम जीतने के चक्कर में उधार लेकर गेम खेलते और हार जाते थे। इसके बाद उन्हें डॉ. अफजल की टीम का कोई सदस्य संपर्क करता था। वह हारी हुई रकम को चुकाने का दबाव बनाता था। परेशान हो चुके लड़कों को समझाते, किडनी बेच दो…
फोन करने वाला परेशान हो चुके लड़कों को धीरे-धीरे समझाता कि अगर रकम चुकाना चाहते हो तो किडनी भी डोनेट कर सकते हो। डॉक्टर काउंसिलिंग करता कि बॉडी में 2 होती है। एक के सहारे आराम से जिंदगी जी जा सकती है। एक किडनी देकर 20 से 25 लाख रुपए आराम से मिल जाएंगे। उधार चुकता करके ऐश से जिंदगी जीना। DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी कहते हैं- किडनी डोनेट करने के लिए इन लड़कों पर साइकोलॉजिक प्रेशर बनाया जाता था। अमेरिका, लंदन की यूनिवर्सिटी की स्टडीज भेजी जाती थी। इनमें ऐसे लोगों की रिसर्च होती थी, जो एक किडनी के साथ पैदा हुए थे। अपनी औसतन उम्र तक पूरी तरह से स्वस्थ्य रहे थे। पूरी तरह से ब्रेनवॉश किए जाने के बाद उनकी किडनी डोनेट कराई जाती थी। गैंग के सदस्यों ने बेंगूसराय (बिहार) के आयुष कुमार के केस में यही पैटर्न अपनाया था। उसका दिल्ली के बैंक में म्यूल अकाउंट भी खुलवाया गया। फिर उसे बरगलाकर 9.50 लाख रुपए में किडनी डोनेट करने को राजी किया गया था। आयुष ने डॉ. अफजल को वाट्सऐप मैसेज किए…पढ़िए
आयुष- भैया, छोड़ देते हैं, मेरा टाइम बर्बाद हो रहा है। मैं अब एग्जाम नहीं दे पाऊंगा। आपने 6000 रुपए दिए थे, थोड़ा-थोड़ा करके वापस दे दूंगा। 2 से 3 महीने लगेंगे। प्लीज, अब मुझसे नहीं हो पाएगा। इस काम से मैं बहुत परेशान हो गया हूं।
आपकी या वैभव सर की भी गलती नहीं है। गलती मेरी किस्मत की है। 7 से 10 दिन के लिए आया था। 12 दिन पहले ही हो चुके हैं, अब तक OT तक नहीं हुआ। आप बुरा मत मानना, 30-40 दिन के लिए बोल रहे थे, मैंने मना कर दिया है। क्योंकि पैसा थोड़ा कम चलेगा, लेकिन टाइम पर काम आ जाए, वही ठीक है। पारुल के किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 10 दिन कानपुर रहा था परवेज
पुलिस परवेज सैफी को मेरठ से कानपुर लेकर आ रही है। परवेज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डॉक्टरों को लाने का काम करता था। DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी बताते हैं- पारुल तोमर के किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान परवेज ही डॉ. रोहित की टीम को लेकर कानपुर आया था। 10 दिनों तक यहीं रहा था। जिन 50 ऑपरेशन की जानकारी हमें मिली हैं, उनमें परवेज का मूवमेंट भी सामने आया है। यह भी सामने आया कि परवेज सैफी पर मेरठ और बागपत में लूट के मुकदमे, गाजियाबाद के टीला मोड़ पर डकैती का मुकदमा और एक हत्या का प्रयास का भी मुकदमा दर्ज है। DCP ने बताया- पारुल के ट्रांसप्लांट के दौरान उसका पति विकास तोमर और भाई दिव्यांक आहूजा हॉस्पिटल में मौजूद थे। लेकिन, पुलिस की छापेमारी के दौरान विकास हॉस्पिटल से निकल गया था। जबकि दिव्यांक वहीं रुका रहा था। इसके बाद से विकास पुलिस के सामने नहीं आया है। पारुल के ट्रांसप्लांट के बाद डॉ. अफजल को 22 लाख रुपए दिए गए थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि जो वीडियो सामने आया, वो उन्हीं नोटों की गडि्डयों का है। हैलट का गार्ड बना हॉस्पिटल मालिक
DCP वेस्ट ने बताया- कानपुर के मसवानपुर में मेडिलाइफ हॉस्पिटल है। इसके मालिक डॉ. रोहन और डॉ. नरेंद्र से पूछताछ की गई। तब अजय नाम के एक नए किरदार का पता चला। अजय को हैलट हॉस्पिटल में मृतक आश्रित कोटे में गार्ड की जॉब मिली थी। सिर्फ 1 साल नौकरी करने के बाद अजय ने कल्याणपुर के केशवपुरम में स्टार हॉस्पिटल खोल दिया था। यहां उसने डॉ. रोहन और डॉ. नरेंद्र को नौकरी पर रखा था। बताया जा रहा है कि रोहन और नरेंद्र ने वहां प्रैक्टिस करने के बाद संदीप के साथ मिलकर मेडिलाइफ हॉस्पिटल खोला था। हालांकि कन्नौज का रहने वाला संदीप अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है। पुलिस की पूछताछ में अजय ने बताया कि मेरे हॉस्पिटल में ज्यादातर एबॉर्शन के केस आते थे। 2022-23 में घाटा होने की वजह से हॉस्पिटल को बंद करना पड़ा था। अजय ने बताया- मैंने ही रोहन और नरेंद्र को एजेंट शिवम काड़ा से मिलवाया था। इसके बाद शिवम काड़ा और डॉ. रोहित, दोनों मेडिलाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए राजी हो गए थे।
जब पुलिस ने पूछा कि शिवम काड़ा, डॉ. नरेंद्र और रोहन के बीच डील को लेकर क्या तय हुआ था? तब अजय ने कहा- मुझे इसके बारे में नहीं पता। पुलिस ने करीब 3 घंटे की पूछताछ के बाद अजय को नोटिस जारी किया और उसे छोड़ दिया। दूतावास से अफ्रीकन महिला की डिटेल मांगी गई
साउथ अफ्रीकन महिला अरेबिका का VIDEO सामने आने के बाद अब पुलिस के सामने बड़ा टास्क उसकी डिटेल पता करना है। पुलिस अफसरों का मानना है कि अफ्रीकन महिला की जानकारी देने में एजेंट शिवम अग्रवाल (काड़ा) एक महत्वपूर्ण कड़ी है। क्योंकि शिवम का ही वीडियो सामने आया है, जिसमें वह स्टेथोस्कोप (आला) लगाकर जांच करते हुए दिख रहा है। इसके साथ ही पुलिस ने साउथ अफ्रीका की एंबेसी से भी संपर्क किया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि अरेबिका की दिल्ली में गैंग के सदस्यों से मुलाकात हुई। वह किस वीजा पर भारत में आई? उसका अटेंडेंट कौन था? यह सब अभी तक पता नहीं चल सका है। DCP वेस्ट कासिम आबिदी के मुताबिक, शिवम गिरोह की मेन कड़ी है। उससे कई राज उगलवाने के लिए कोर्ट से 7 दिन की रिमांड मांगी गई है। रिमांड मिलने के बाद उसे मेरठ और दिल्ली ले जाया जाएगा। एजेंट नवीन के घरवाले बोले- वह बैटरी कंपनी में जॉब करता है
किडनी ट्रांसप्लांट केस में प्रयागराज के एजेंट नवीन पांडेय का नाम भी सामने आया है। हमारी टीम कानपुर में नवीन के घर पहुंची। उसके परिवार के लोगों को पता ही नहीं था कि वह किडनी ट्रांसप्लांट गैंग से जुड़ा है। पुलिस को घर पर उसके 4 भाई मिले। उन्होंने बताया कि नवीन एक बैटरी कंपनी में काम करता है। पुलिस ने जब उसके किडनी गैंग से जुड़े होने की जानकारी दी तो उनके होश उड़ गए। DCP वेस्ट ने बताया- नवीन पांडेय दिल्ली-NCR क्षेत्र में किडनी ट्रांसप्लांट कराने के गोरखधंधे के लिए हॉस्पिटल्स को मैनेज करता था। 9 हॉस्पिटल के नाम सामने आए, DCP ने 4 शहरों के CMO को लेटर लिखा
DCP वेस्ट ने बताया- गाजियाबाद, मेरठ, लखनऊ और कानपुर के CMO को 9 हॉस्पिटल की डिटेल भेजी गई है। किडनी ट्रांसप्लांट केस की जांच में अलग-अलग हॉस्पिटल के नाम सामने आए हैं। 4 शहरों के 9 हॉस्पिटल के नाम सामने आए हैं। इनकी भूमिका भी जांच कराई जा रही है। महाराष्ट पहुंची कानपुर की टीम
मामले की जांच में लगी साइबर टीम को गैंग के एक मुख्य सदस्य की लोकेशन महाराष्ट्र में मिली है। इसके बाद एक टीम को रवाना किया गया है। वहीं लखनऊ के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में आयुष से पूछताछ करने भी एक टीम पहुंची थी। इसमें सामने आया कि देहरादून की ग्राफिक एरा से उसने पढ़ाई ही नहीं की थी। वह उत्तरांचल यूनिवर्सिटी का छात्र है। शुरुआत में उसने झूठ बोला था।
————————- ये खबरें भी पढ़ें- कानपुर में किडनी निकालने वाला डॉक्टर नोटों पर लेटता था, बिस्तर पर गड्डियों से हवा करता दिखा अफजल कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट केस में 3 नए वीडियो मिले हैं। ये सभी वीडियो दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल से मिले हैं। कुछ ऐसी चैट भी मिली हैं, जो इस काले कारोबार का खुलासा करती हैं। पहला वीडियो- इसमें किडनी निकालने वाला डॉक्टर अफजल दिख रहा है। वह नोटों की गड्डियों पर लेटा है। बेड पर करीब 15 लाख रुपए चादर की तरह बिछे दिख रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर… किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट, ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। डोनर और रिसीवर दोनों से डील फाइनल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग ठिकानों पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पढ़ें पूरी खबर OT टेक्नीशियन ने निकाली थी MBA स्टूडेंट की किडनी, कानपुर में ट्रांसप्लांट किया; मेरठ के 3 डॉक्टरों के भी नाम सामने आए कानपुर में MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी किसी डॉक्टर ने नहीं, बल्कि एक ओटी टेक्नीशियन ने निकाली थी। उसी ने पारुल तोमर को किडनी ट्रांसप्लांट भी किया था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने यह जानकारी दैनिक भास्कर को दी। उन्होंने बताया- आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। पढ़ें पूरी खबर


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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