लखनऊ के गोमती नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 9 बटुकों का विधि-विधान से यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया गया। साथ ही, 2 श्रद्धालुओं ने दीक्षा संस्कार ग्रहण किया। इस आयोजन में लखनऊ के अलग-अलग क्षेत्रों से आए बटुकों और उनके परिजनों ने भाग लिया। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की सुगंध से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। संस्कार की प्रक्रिया आचार्य विश्वनाथ शुक्ला के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। संस्कार व्यक्ति के जीवन में अनुशासन आचार्य शुक्ला ने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्कार व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, संस्कार और आध्यात्मिक जागरूकता लाता है। उन्होंने इसे केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम बताया। कार्यक्रम में गायत्री शक्तिपीठ गोमती नगर के मुख्य ट्रस्टी शिव शंकर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित थे। सभी ने बटुकों को आशीर्वाद प्रदान किया।यह आयोजन समाज में संस्कारों के प्रति जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश देता है।

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