गायत्री तीर्थ शांतिकुंज से ज्योति कलश चित्रकूट धाम पहुंचा। यहां चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आलोक चौबे और जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति डॉ. शिशिर पाण्डेय ने कलश का पूजन किया और अपने विचार साझा किए। गायत्री शक्तिपीठ के संचालक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी और शांतिकुंज प्रतिनिधि सुरेश पाण्डेय ने बताया कि 175 रथ पूरे विश्व में सदज्ञान, शांति और युग परिवर्तन का संदेश लेकर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज से रवाना हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह विचार क्रांति की योजना है, जो प्रज्ञा अवतार और कल्कि अवतार के रूप में सक्रिय होकर महाविनाश को रोकने में सहायक होगी। यह विश्वव्यापी अभियान का एक छोटा प्रयास है।
उन्होंने यह भी बताया कि युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने इसी ज्योति के सानिध्य में कठोर तप किया था, जिसके सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। वंदनीया माताजी के जन्म और गुरुदेव के विश्वव्यापी अभियान को भी सौ वर्ष हो चुके हैं। इस कलश में 2400 तीर्थों का जल भी समाहित है। कुलगुरु डॉ. आलोक चौबे ने पूजन कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करने की बात कही। उन्होंने बताया कि उनके सभी विभागाध्यक्ष भी इस अवसर पर उपस्थित थे। डॉ. चौबे ने गायत्री मंत्र के साथ अपने बचपन के जुड़ाव का जिक्र किया और कहा कि वे शांतिकुंज में इस ज्योति के दर्शन का सौभाग्य पहले भी प्राप्त कर चुके हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. शिशिर पाण्डेय ने शांतिकुंज के अभियान को अभिनंदन योग्य बताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव और माताजी ने दुनिया को बदलने का बहुत बड़ा कार्य किया है। उन्होंने गायत्री परिवार के संतों और परिजनों के मार्गदर्शन का अनुगमन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी छात्र और आचार्य गण भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में कुल सचिव, डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. गोपाल मिश्रा, उप जोन समन्वयक रामजीत पाण्डेय, जिला समन्वयक भवानी दीन यादव, रामशरण शास्त्री, श्रवण गुप्ता, राजकुमार ओझा और सुधीर द्विवेदी सहित कई गायत्री परिजन उपस्थित रहे।

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