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गाजीपुर से 3 अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरफ्तार:700 से अधिक फर्जी खातों से 67 करोड़ की ठगी, MSME-GST के जरिए खुलवाते थे करंट अकाउंट

गाजीपुर से 3 अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरफ्तार:700 से अधिक फर्जी खातों से 67 करोड़ की ठगी, MSME-GST के जरिए खुलवाते थे करंट अकाउंट


                 गाजीपुर से 3 अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरफ्तार:700 से अधिक फर्जी खातों से 67 करोड़ की ठगी, MSME-GST के जरिए खुलवाते थे करंट अकाउंट

गाजीपुर से 3 अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरफ्तार:700 से अधिक फर्जी खातों से 67 करोड़ की ठगी, MSME-GST के जरिए खुलवाते थे करंट अकाउंट

गाजीपुर में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी देशभर में सैकड़ों फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उन्हें टेलीग्राम पर संचालित ‘क्राउन पे’ नामक नेटवर्क को बेचते थे। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को 3 अप्रैल 2026 को लंका मैदान के सामने फुल्लनपुर तिराहे से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 75 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों में अब तक करीब 67 करोड़ रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था और फर्जी खातों के जरिए देशभर में साइबर अपराधियों को बैंकिंग चैनल उपलब्ध कराता था। पैसों की जरूरतमंदों को बनाते थे निशाना पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ऐसे लोगों को टारगेट करते थे, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। उन्हें लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इसके लिए आरोपी पहले आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो के जरिए MSME प्रमाणपत्र बनवाते थे। इसके बाद GST रजिस्ट्रेशन कराकर संबंधित व्यक्ति के नाम से करंट अकाउंट खुलवाया जाता था। यूजर आईडी, पासवर्ड और मोबाइल एक्सेस भी सिंडिकेट को सौंपते थे। खाता खुलने के बाद आरोपी उसकी पूरी डिटेल—जैसे इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी, पासवर्ड, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी—टेलीग्राम के जरिए सिंडिकेट को भेज देते थे। इतना ही नहीं, आरोपी खाताधारकों के मोबाइल में ‘क्राउन एसएमएस’ और ‘डब्ल्यूपीएवाई डीएस’ जैसी APK फाइलें भी इंस्टॉल कराते थे। इससे बैंक खाते से जुड़े OTP और ट्रांजैक्शन मैसेज सीधे गिरोह तक पहुंच जाते थे। ट्रेडिंग, गेमिंग और साइबर ठगी की रकम होती थी ट्रांसफर पुलिस के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल ट्रेडिंग, गेमिंग और अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इसके बाद ठगी की रकम को बाइनेंस और कू-कॉइन जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के जरिए USDT में बदला जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी कमीशन लेकर नेटवर्क को बैंकिंग सपोर्ट उपलब्ध कराते थे। तीनों आरोपी गाजीपुर और सोनभद्र के रहने वाले गिरफ्तार आरोपियों में ऋषिराज निवासी शादियाबाद, गाजीपुर, रोहन कुमार निवासी जमानिया, गाजीपुर और सचिन सिंह निवासी सोनभद्र शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इनके पास 700 से अधिक म्यूल खाते थे। पुलिस के मुताबिक, सचिन सिंह ने करीब 2.50 करोड़ रुपए और रोहन कुमार ने करीब 1.75 करोड़ रुपए साइबर अपराध से कमाने की बात कबूल की है। 19 सिम, 12 एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 19 सिम कार्ड, 12 एटीएम कार्ड, 5 बैंक पासबुक, एक चेकबुक, 5 मोबाइल फोन, एक फर्म की मुहर और GST व MSME से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन की कीमत करीब 2 लाख रुपए बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह करीब दो दर्जन खातों का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर ठगी की रकम जुटा रहा था। साइबर मुख्यालय और गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी रिपोर्ट पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़ी शिकायतों का गहन विश्लेषण कर रही है। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट साइबर मुख्यालय लखनऊ और गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) को भेजी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


Source: Dainik Bhaskar via DNI News

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