DniNews.Live

गाजियाबाद के हरीश राणा का 3 दिन से खाना-पानी बंद:सामान्‍य बेड पर शिफ्ट किए गए, मरीज को दर्द न हो; डॉक्टर इसका रख रहे ख्याल

गाजियाबाद के हरीश राणा को अब वेंटिलेटर और अन्‍य लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम हटा दिया गया है। उन्हें अब सामान्‍य बेड पर शिफ्ट किया गया है। तीन दिनों से उनका खाना-पानी बंद है। फीडिंग ट्यूब पर कैप लगा दिया गया था। डॉक्टर अब पैलिएटिव केयर के सिद्धांत के तहत हरीश राणा का ख्याल रख रहे हैं। हर 30 मिनट में AIIMS के वरिष्ठ डॉक्टर और एक्सपर्ट की टीम चेकअप कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हम चाहते हैं कि हरीश के जीवन का अंत सम्मान और गरिमा के साथ हो। मरीज को कोई दर्द या तकलीफ न हो, इसका उपाय कर रहे हैं। हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे कि मरीज की उम्र लंबी हो। हरीश 13 साल से कोमा में हैं। सुप्रीम कोर्ट से परमीशन मिलने बाद दिल्ली एम्स में उन्हें इच्छामृत्यु दी जा रही है। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने मां-बाप की याचिका पर हरीश को इच्छामृत्यु की इजाजत दी थी। 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद के राजनगर स्थित राज एंपायर सोसायटी स्थित घर से दिल्ली एम्स शिफ्ट किया गया था। 72 घंटों में हरीश की स्थिति और भी नाजुक हुई हरीश की मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा को एम्स प्रशासन ने वार्ड के बगल में ही रूम दिया है। मां निर्मला राणा ही बेटे के पास अधिकतर समय रहती हैं। जबकि हरीश के पिता अशोक राणा, भाई और बहन कभी-कभी मिलने जाते हैं। घरवाले एक ही प्रार्थना कर रहे हैं, कि हरीश बिना किसी दर्द और तड़प के इस जीवन से विदा ले। एम्स के सूत्र बताते हैं कि पिछले 72 घंटों में हरीश की स्थिति और भी नाजुक हुई है। हरीश की निगरानी में 24 घंटे डॉक्टरों की टीम लगीं हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में एक एक्सपर्ट डॉक्टर का कहना है कि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में है। इसलिए इसमें कुछ भी बयान नहीं दिया जा सकता। मरीज का ब्रेन डेड है। यानी मरीज को नहीं पता है कि वह कहां है और किस स्थिति में है। मरीज की उम्र 32 से 33 साल के बीच है। इस उम्र के मरीज को भोजन और पानी बंद होने पर अधिकांश वह 10 से 12 दिन ही जी सकता है। बॉडी में जो शुगर होती है उसी के आधार पर मरीज जीता है। जैसे जैसे वह कीटोन में तब्दील होगी हालत नाजुक होने लगती है। यूरिन और दूसरे टेस्टों से यह बताया जा सकता है कि स्थिति कितनी कमजोर हुई है। घर से AIIMS ले जाने से पहले का वीडियो सामने आया था
जब 14 मार्च को हरीश को घर से AIIMS ले जाया जा रहा था, उस दिन उसके घर ब्रह्मकुमारी आश्रम की दीदी लवली पहुंची थीं। उन्होंने हरीश के माथे पर चंदन का टीका लगाया था। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था- सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ…ठीक है। इस दौरान हरीश के परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गई थीं। पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी थी। कहा था कि न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा। करीब 6 साल पहले हरीश का पूरा परिवार गाजियाबाद शिफ्ट हुआ था। इससे पहले 13 साल तक हरीश राणा के पिता अशोक राणा दिल्ली रहे। ‘सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया’ राणा परिवार ने कहा था कि हाईकोर्ट ने तो हमारी याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी देकर हरीश पर बड़ा उपकार किया। हमसे उसकी पीड़ा देखी नहीं जा रही थी। बेबसी ये है कि वह बता भी नहीं पाता कि उसे कहां-क्या तकलीफ है? हम तो इसे पैसिव यूथेनेशिया भी नहीं बोलना चाहते। हम इसे भगवान की गोद में छोड़ रहे हैं। जब हरीश प्राण त्याग देगा तो बहुत सम्मान से घर लाएंगे और उसे अंतिम विदाई देंगे। परिवार और सोसाइटी में खामोशी छाई
हरीश के दिल्ली AIIMS में शिफ्ट होने के बाद से परिवार में खामोशी है। पिता भी किसी से मिल नहीं रह रहे। सोसाइटी के लोग बताते हैं कि वह भावुक हैं। बहन और मां दिल्ली AIIMS से लौटने के बाद भी रोए। मां निर्मला ने कहा था कि जिसे जन्म दिया, पाल-पोसकर बड़ा किया। फिर से अबोध की तरह उसकी देखभाल की। दुख तो बस इस बात का रहा कि उसने तो अपनी पीड़ा भी नहीं बताई। सुबह-शाम जब उसकी मालिश करती, तो मैं उसे घर के किस्से सुनाती थी कि आज क्या-क्या हुआ? कई बार घंटों तक इंतजार करती कि एक बार बस पलक झपक जाए। जिससे मुझे लगे कि उसने सब सुन लिया। कभी उबासी लेता, कभी छींक आती या आंखों के आसपास की त्वचा फड़कती तो हमें उसके जिंदा होने का सुकून होता था। हरीश इस हाल में कैसे पहुंचे, वजह जानिए…
दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे। साल 2013 में आखिरी सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। हादसे के बाद उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और कोमा में चले गए थे। तब से न वह बोल पा रहे और न ही किसी चीज को महसूस कर पा रहे। डॉक्टरों ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है। इस स्थिति में मरीज फीडिंग ट्यूब (खाने-पीने की नली) और वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसमें ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है। पिछले 13 साल से लगातार बिस्तर पर पड़े रहने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडशोल (गहरे घाव) भी हो गए हैं। समय के साथ उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी, 13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। देश में इस तरह का यह पहला मामला है। पूरी खबर पढ़ें

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *