DniNews.Live

गहमर के मां कामाख्या धाम में नवरात्रि पर उमड़ी आस्था:युद्ध के दौरान सैनिकों की रक्षा के लिए खुद सरहद पर चली जाती हैं, आज तक एक भी जवान शहिद नहीं

गाजीपुर जिले के गहमर स्थित सिद्ध पीठ माँ कामाख्या धाम में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। गहमर को एशिया के सबसे बड़े फौजियों के गांव के रूप में जाना जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन भी मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी गईं। यह सिलसिला पूरे नौ दिनों तक जारी रहने की संभावना है। माँ कामाख्या को सिकरवार वंश की कुलदेवी माना जाता है, जिससे इस धाम का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान, यहाँ नौ देवियों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माँ के दरबार में पहुँचते हैं। गहमर गांव की एक खास पहचान देश सेवा से भी जुड़ी है, जहाँ से बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में कार्यरत हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माँ कामाख्या अपने भक्तों, विशेषकर सैनिकों की रक्षा करती हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि माँ भगवती की कृपा से सैनिक युद्ध क्षेत्रों में सुरक्षित रहते हैं। यहाँ एक और विशेष परंपरा प्रचलित है। बताया जाता है कि जब भी कोई सैनिक छुट्टी पर अपने घर आता है, तो वह सबसे पहले माँ कामाख्या के दरबार में हाजिरी लगाकर आशीर्वाद लेता है। इसी तरह, ड्यूटी पर वापस लौटते समय भी सैनिक माँ का आशीर्वाद लेकर ही रवाना होते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि माँ भगवती सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसी आस्था और विश्वास के साथ दूर-दराज से श्रद्धालु इस धाम में पहुँच रहे हैं। तस्वीरें देखिए…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *