मधुबनी जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक गंगासागर पोखर के समीप काली मंदिर में नववर्ष के अवसर पर अष्टयाम तांत्रिक पूजा का आयोजन किया गया। इस वार्षिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और मां काली की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में नववर्ष के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। चारों ओर भक्ति, मंत्रोच्चार और शंखनाद से वातावरण भक्तिमय बना रहा। पूजा-अर्चना 31 दिसंबर को अष्टयाम के प्रारंभ के साथ शुरू हुई, जिसका समापन 1 जनवरी को विधिवत रूप से किया गया। पंडित ने तंत्र को बताया गूढ़ विज्ञान मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नरेश ठाकुर कॉलअचारी ने बताया कि वे प्रारंभ से ही तंत्रशास्त्र के अनुसार मां भगवती की उपासना करते आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तंत्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक गूढ़ विज्ञान है, जो आज के समाज में लगभग लुप्त होता जा रहा है। पंडित कॉलअचारी के अनुसार, जहां भौतिक विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहीं से तंत्र विज्ञान की शुरुआत होती है। तंत्र में आध्यात्मिक और भौतिक दोनों ही तत्वों का समन्वय देखने को मिलता है। गंगासागर पोखर के पास काली मंदिर में 15 वर्षों से लगातार अष्टयाम पंडित नरेश ठाकुर ने 1 जनवरी को सामाजिक पर्व बताते हुए कहा कि शास्त्रों में भले ही इस तिथि को नववर्ष मानने का उल्लेख न हो, लेकिन सामाजिक व्यवहार में इसे विश्व पर्व के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने व्यवहारिकता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि अष्टयाम का यह आयोजन पिछले 15 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पुराने वर्ष की विदाई और नववर्ष के स्वागत के साथ मां भगवती की कृपा प्राप्त करना है। श्रद्धालुओं ने इस अष्टयाम में भाग लेकर अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की।
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