स्मार्ट सिटी बरेली के खुले नाले में गिरकर हुई यात्री की मौत के बाद नगर निगम अब सभी नालों को ढकने का प्लान तैयार कर रहा है। बरेली में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 400 किलोमीटर लंबे नाले हैं, जिन्हें ढकने के लिए 500 करोड़ रुपये लगेंगे। नगर आयुक्त ने बताया कि नालों को ढकने के लिए बहुत बड़े बजट की आवश्यकता है, इसलिए इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा और फेज वाइज काम कराया जाएगा। अब ढके जाएंगे सभी नाले
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नालों को ढकने के लिए एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। नगर निगम काफी समय पहले से ही इसमें प्रयास कर रहा है, क्योंकि काफी बड़ा अमाउंट नालों को कवर करने में लगेगा। इसलिए फेज वाइज कार्य चल रहा है। सुभाषनगर में ही एक पुलिया है जहां बड़ा नाला है, इसे ऑलरेडी साढ़े तीन करोड़ से ढका जाएगा। इसमें स्लैब डाले जाएंगे और इसका टेंडर भी फाइनल हो चुका है। बाकी जो गहरे नाले हैं, वहां पर कोई हादसा न हो उसके लिए बैरिकेडिंग करवाई जा रही है। जहां पर संभव है, वहां लगभग 3 से 3:30 फीट की रेलिंग भी लगाई जा रही है। यह भी लिखा जा रहा है कि “यहाँ गहरा नाला है, कृपया सावधानीपूर्वक चलें।” उन्होंने कहा कि बरेली में करीब 400 किलोमीटर लंबे छोटे-बड़े नाले हैं, इन सभी को ढका जाएगा, जिसमें बड़े नाले करीब 70 किलोमीटर के हैं। हम शासन में प्रस्ताव भेजकर इन सभी नालों को कवर करवाएंगे। मामले की जांच के बाद होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि सैटेलाइट बस स्टैंड पर नाले में गिरने से हरदोई के यात्री तौहीद की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही दुखद हादसा है। हमने उसे बचाने का काफी प्रयास किया और 30 घंटे तक रेस्क्यू चलाया गया था। मैं खुद दो दिन तक मौके पर मौजूद रहा। उन्होंने यह भी कहा कि नाले का स्लैब हटाकर उसे दोबारा क्यों नहीं लगाया गया, इसकी जांच अपर आयुक्त से करवाई जा रही है। जांच के बाद लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब विस्तार से जानें पूरा मामला
दरअसल, हरदोई के शाहाबाद देहात निवासी 30 साल का तौहीद उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक प्राइवेट कंपनी में ट्रक ड्राइवर था। वह ट्रक खड़ा करके रुद्रपुर से अपने घर हरदोई जा रहा था। मंगलवार की रात में बरेली सैटेलाइट बस स्टैंड पर हरदोई की रोडवेज बस में बैठने के लिए उतरा, जिसके बाद वह सैटेलाइट बस स्टैंड पर खुले नाले में समा गया। यह नाला करीब 15 फीट गहरा है। कुछ लोगों ने उसे गिरते देखा तो बचाने का भी प्रयास किया, लेकिन नाला काफी गहरा था जिस कारण उसे बचाया नहीं जा सका। फौरन अधिकारियों और पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई। 30 घंटे चला था रेस्क्यू
मंगलवार रात करीब साढ़े 9 बजे तौहीद नाले में गिरा, जिसके बाद उसे निकालने के लिए रेस्क्यू शुरू किया गया। रेस्क्यू में 5 जेसीबी, सीवर साफ करने वाली मशीन और करीब 100 कर्मचारी दिन-रात लगे रहे, तब जाकर 30 घंटे बाद गुरुवार रात 3 बजे उसका शव नाले से बरामद किया जा सका। तौहीद की जेब से निकले आधार कार्ड से उसकी शिनाख्त हो पाई थी, जिसके बाद उसके परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी गई। यह हादसा नहीं, सरकारी हत्या है
तौहीद की मौत की खबर मिलते ही हरदोई से बरेली पहुँचे उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। तौहीद के भाई नदीम ने आँखों में आंसू और रुंधे हुए स्वर के साथ सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए। नदीम ने कहा, “मेरा भाई कोई लावारिस नहीं था। वह रुद्रपुर की बड़ी कंपनी ‘अशोक लीलैंड’ में ट्रक ड्राइवर था। वह हाल ही में चेन्नई से ट्रक लेकर लौटा था और घर आने के लिए बहुत उत्साहित था। मंगलवार को उसने फोन पर बताया था कि वह बस पकड़कर बरेली पहुँच रहा है और सुबह तक घर होगा। हमें क्या पता था कि बरेली का बस स्टैंड उसके लिए कब्रगाह बन जाएगा।”
नदीम ने आगे आक्रोश जताते हुए कहा, “जब हम मौके पर पहुँचे तो देखा कि नाला पूरी तरह खुला था। वहां कोई रोशनी नहीं थी, कोई चेतावनी बोर्ड नहीं था। मेरे भाई की जेब से रोडवेज का टिकट मिला है, जो साबित करता है कि वह एक वैध यात्री था। यह बरेली नगर निगम की घोर लापरवाही है। अधिकारियों ने महज एक स्लैब न लगाकर मेरे भाई की जान ले ले ली। हम इसे हादसा नहीं मानेंगे, यह सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या है। हमारी मांग है कि जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो। तौहीद अपने छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था, पूरे घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। अब उसके बूढ़े पिता रहीस और माँ सलमा का सहारा कौन बनेगा?”
चूक हुई है, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा नगर आयुक्त ने दी सफाई
इस दर्दनाक हादसे पर घिरे नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए सफाई दी। उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि मामला बेहद दुखद है और प्रशासन इसकी तह तक जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया, “सैटेलाइट बस स्टैंड के पास तीन मुख्य नालों का जंक्शन पॉइंट है। यहाँ नाले की गहराई करीब 15 फीट है और पानी का बहाव बहुत तेज रहता है। हमने सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि युवक नाले के ऊपर रखे एक स्लैब पर बैठा था और अचानक पीछे की ओर लुढ़ककर नाले में गिर गया।”
जब उनसे लापरवाही के बारे में सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया, “यह सच है कि नाले की सफाई के लिए पूर्व में स्लैब को तोड़कर किनारे रखा गया था ताकि चेंबर से कचरा निकाला जा सके। सफाई के बाद उसे दोबारा यथास्थान मजबूती से फिक्स नहीं किया गया, जो कि एक बड़ी तकनीकी चूक है। जिस भी स्तर पर लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।” परिवहन निगम के पत्रों के दावे पर उन्होंने कहा, “रोडवेज के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने पत्र लिखे थे। हम अपने रिकॉर्ड चेक करवा रहे हैं। यदि कार्यालय में ऐसा कोई पत्र प्राप्त हुआ था और उस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो संबंधित लिपिक और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें निलंबित किया जाएगा।” मेयर डॉ. उमेश गौतम का कड़ा रुख: “रोडवेज अधिकारियों की लापरवाही से गई जान, सीएम से होगी शिकायत”
हादसे के बाद बरेली के मेयर डॉ. उमेश गौतम ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है। मेयर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है, लेकिन इसके लिए रोडवेज के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। सैटेलाइट बस स्टैंड रोडवेज का परिसर है। उनकी यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती थी कि जब उनके बस स्टैंड के पास नाला खुला पड़ा था, तो वे उसे ढकवाते या कम से कम वहां सुरक्षा बैरिकेडिंग लगवाते। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी की।”
उन्होंने आगे कहा, “रोडवेज के अधिकारी अब यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उन्होंने नगर निगम को पत्र लिखे थे। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या पत्र लिखना ही काफी था? अगर नगर निगम की ओर से देरी हो रही थी, तो रोडवेज के अधिकारियों को मुझसे या नगर आयुक्त से व्यक्तिगत रूप से मिलकर शिकायत करनी चाहिए थी। मैं इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा हूँ और व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर रोडवेज के इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करूँगा।” प्रशासन और नगर निगम से 5 चुभते सवाल घटनाक्रम: मौत के 30 घंटों की टाइमलाइन

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