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खरना पर कुएं से जल लाने की अनूठी परंपरा, पीतल के बर्तन में बनता है प्रसाद

भास्कर न्यूज | लखीसराय लोक आस्था के महापर्व छठ का दूसरा दिन खरना समर्पण और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जिले के विभिन्न मंदिरों से जुड़ी एक अनूठी परंपरा देखने को मिलती है। छठ व्रती महिलाएं खरना के प्रसाद के लिए पास के मंदिरों के कुएं से जल लेकर आती हैं। मान्यता है कि मंदिर के कुएं का जल पवित्र और शुभ फलदायी होता है, जिससे पूजा का प्रसाद और अधिक शुद्ध माना जाता है। पीतल के लोटे या कलश में जल भरकर बड़ी श्रद्धा के साथ घर लाती हैं और उसी जल से मीठा चावल-रोटी का प्रसाद तैयार करती हैं। खरना के प्रसाद को सूर्यदेव को अर्पित करने के बाद परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रसाद बांटने की परंपरा भी है। ग्रामीण इलाकों में यह मान्यता गहराई से जुड़ी है कि मंदिर के कुएं से लाया गया जल व्रती को शक्ति, शांति और संतोष प्रदान करता है। खरना की इस परंपरा में आस्था और शुद्धता का अद्भुत संगम झलकता है, जो आज भी लखीसराय की धार्मिक पहचान का हिस्सा है।


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