गोरखपुर की खजनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीराम चौहान अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत नजर आते हैं। उनका कहना है कि वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और संगठन जहां जिस रूप में उपयोग करेगा, वह उसी तरह काम करेंगे। चार साल के कार्यकाल में हुए विकास कामों को लेकर वह संतुष्ट हैं और खुद को 10 में से 10 नंबर देते हैं। हालांकि, जमीन की कमी के कारण कुछ परियोजनाएं शुरू न हो पाने की कसक भी उनके मन में है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अपने कार्यकाल, अधूरे प्रोजेक्ट और आगामी चुनाव को लेकर विस्तार से बात की। पढ़िए सवाल-जवाब… सवाल: पिछले 4 साल के अपने कामकाज को आप 10 में से कितने नंबर देंगे? जवाब: पिछले चार सालों में क्षेत्र में काफी विकास हुआ है। अगर नंबर देने की बात है तो मैं अपने कामकाज को 10 में से 10 नंबर दूंगा। सड़क, पुल-पुलिया और औद्योगिक विकास हर क्षेत्र में प्रगति हुई है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद आवागमन की सुविधा काफी बढ़ी है। बेलघाट से शाहपुर होते हुए उरुवा तक की जर्जर सड़क का चौड़ीकरण हुआ है। बेलघाट से कुरी बाजार और बेलघाट से सिसवा बाबू तक भी सड़कें बनी हैं। इसके अलावा कई छोटी-बड़ी सड़कें बनी हैं। यहां कस्तूरबा आवासीय विद्यालय भी बन गया है, जिससे बच्चियों की पढ़ाई में काफी मदद मिल रही है। अब जो लोग क्षेत्र में आते हैं, वे खुद कहते हैं कि यह इलाका पहले भले ही पिछड़ा रहा हो, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सवाल: सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया? जवाब: विकास के कई काम हुए हैं। सिकरीगंज-ढेबरा-हाटा मार्ग बन गया है। महादेवा से सोपरा मार्ग बनने से क्षेत्र के विकास को गति मिली है। रकौली से बनकटा मार्ग का शिलान्यास हो चुका है और उसका काम प्रगति पर है। सिकरीगंज से बेलघाट तक की जर्जर सड़क का भी निर्माण पूरा हो गया है। पहले इन सड़कों की हालत बहुत खराब थी, लेकिन अब वहां काफी सुधार हुआ है। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जिसे आप नहीं करा पाए? जवाब: हम चाहते थे कि क्षेत्र में एक मिनी स्टेडियम बन जाए, लेकिन अभी तक इसके लिए जमीन नहीं मिल पाई है। बजट आ चुका है और जगह की तलाश की जा रही है। इसके अलावा एक और आवासीय विद्यालय खोलने की योजना है, जिसके लिए भी जमीन की तलाश चल रही है। महादेवा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था की योजना भी बनी थी, लेकिन वहां भी जमीन की कमी आ रही है। हम खजनी, सिकरीगंज, बेलघाट और महादेवा बाजार को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव भी भेज चुके हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह प्रस्ताव भी स्वीकृत हो जाएगा। सवाल: इस बार क्या फिर आप टिकट के दावेदार हैं? जवाब: मैं पार्टी का पुराना कार्यकर्ता हूं। पार्टी जब और जहां उपयोग करना चाहती है, करती है। इसलिए मेरी न कोई जिद है और न कोई मांग। मैं पहले 1989 और 1991 में हैंसर से चुनाव लड़ा। बाद में पार्टी ने मुझे बस्ती लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया। फिर धनघटा से चुनाव लड़ने को कहा और वहां से भी जीत मिली। बाद में पार्टी ने खजनी से चुनाव लड़ने का निर्देश दिया तो यहां आ गया। पार्टी जो कहेगी, वही करूंगा। सवाल: अगर 2027 के चुनाव में पार्टी आपको मैदान में उतारती है तो मुकाबला किससे होगा? जवाब: पहले भी कोई खास लड़ाई नहीं थी और अभी भी नहीं है। इस जिले में किसी अन्य दल की मजबूत स्थिति नहीं है। यह माहौल योगी आदित्यनाथ और यहां के मतदाताओं के कारण बना है। पिछले चुनाव में जिले की सभी सीटें अच्छे अंतर से जीती गई थीं। पहले लोग मुझे बाहरी बताकर प्रचार करते थे, लेकिन अब मैं महादेवा में मकान बनाकर रहने लगा हूं और लोगों के बीच हमेशा उपलब्ध रहता हूं। इसलिए अब यहां कोई बड़ी राजनीतिक लड़ाई नहीं है।

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