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कौटिल्या नगर में लालू-राबड़ी आवास की कहानी:किन-किन नेताओं से प्लॉट लिए इस परिवार ने, माननीयों को जमीन का मामला पटना हाईकोर्ट में चल रहा

खरमास बाद लालू यादव और राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को खाली कर कौटिल्य नगर वाले अपने आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। नया घर 5 सरकारी आवास को मिलाकर बनाया गया है। इसमें 5 बड़े कमरे और दो बड़े हॉल हैं। घर के बाहर एक बड़ा गार्डन एरिया भी है, जहां फिलहाल निर्माण से जुड़े कार्य चल रहे हैं, जिसे सुंदर और आकर्षक रूप देने के लिए पेंटिंग और फिनिशिंग का काम जारी है। लालू–राबड़ी के इस आवास पर पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने पूरी लालू लीला लिखी थी। जिसमें दावा किया था कि लालू को एक प्लॉट अलॉट हुआ था और चार मंत्री-विधायकों से कौड़ियों के दाम अपने नाम लिखवा लिया। भास्कर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, कैसे नियमों को ताक पर रखकर लालू फैमिली ने बनवाया आलीशान घर…। 1987 में बिहार सांसद एवं विधान मंडलीय सदस्य सहकारी समिति को 15 एकड़ सरकारी जमीन दी गई थी। यह जमीन वेटनरी कॉलेज की थी। तब इस को-ऑपरेटिव को जमीन देने का मकसद था कि जिन माननीयों का निजी आवास पटना में नहीं है, उन्हें अलॉट किया जाए। अलॉटमेंट को लेकर कुछ कड़े नियम भी बनाए गए, ताकि माननीय (MLA/MLC) मनमानी न कर पाएं और बगल के आवास पर भी कब्जा न कर लें। इस आवास से जुड़ा मामला पटना हाईकोर्ट में लंबित है। विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने 2016 में जनहित याचिका दायर की थी कि पब्लिक लैंड को इस तरह से क्यों बांटा गया? बता दें, यह जमीन 30 साल की लीज पर दी गई है। इसका लीज 31 दिसंबर 2017 को खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले इसका रिन्युअल किया गया है। नियमों को ताक पर रखकर लालू ने ली जमीनें लालू प्रसाद को जब यहां जमीन अलॉट हुई, वह साल 1992 था। उस समय लालू प्रसाद मुख्यमंत्री थे। लालू प्रसाद के खासम-खास नेता जयप्रकाश नारायण यादव इस को-ऑपरेटिव के चेयरमैन थे। दिवंगत भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने अपनी किताब ‘लालू लीला’ में नियमों की अनदेखी कर लालू यादव को जमीन देने का दावा किया है। सुशील मोदी ने अपनी किताब ‘लालू लीला’ में लिखा है… 5 प्लॉट को मिलाकर बना है आलीशान घर सुशील मोदी की किताब ‘लालू लीला’ के मुताबिक… लालू जब रेल मंत्री थे आवास एसएसबी के जोनल ऑफिस को दिया था कौटिल्या नगर की जमीन माननीयों को आवास के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन कई माननीय यहां इसका व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोगों ने किराए पर भी लगा रखा है। सुशील मोदी ने अपनी किताब में कहा है कि यह लीज की शर्तों का उल्लंघन है। बात लालू प्रसाद की करें तो जब वे केन्द्र में रेल विभाग में मंत्री थे, तब उनके प्लॉट नंबर -208 में गृह मंत्रालय के सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी का जोनल पे एंड एकाउंट ऑफिस खुला था। वर्षों तक यह यहां चलता रहा। गुड्डू बाबा कौटिल्या नगर मामले को लेकर हाईकोर्ट क्यों गए? माननीयों को कौटिल्या नगर में जमीन अलॉट करने के मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने वाले गुड्डु बाबा कहते हैं कि यहां की जमीन वेटनरी कॉलेज की जमीन है। यहां की 20 एकड़ जमीन सांसद- विधायकों को दी गई है। इसकी जानकारी पटना हाईकोर्ट में दायर सीडब्यूजेसी – 3601/2016 में जिलाधिकारी पटना के द्वारा 2020 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ए.पी. शाही के समक्ष शपथ पत्र देकर स्वीकार किया गया कि यह जमीन 1916 में पटना विश्वविद्यालय के लिए एक्वायर हुई थी। उसके बाद वह जमीन वेटनरी कॉलेज को दी गई। वेटनरी कॉलेज की 20 एकड़ जमीन सांसद- विधायक कॉपरेटिव सहित अन्य कई संस्थाओं को दी गई है। वेटनरी कॉलेज के पास 640 एकड़ जमीन के कागजात थे, लेकिन मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर एरियल सर्व करवाया गया, जिसमें वेटनरी कॉलेज की जमीन 753 एकड़ निकली। कोर्ट में जिलाधिकारी ने इसकी जानकारी सरकार ने दी है। यानी जमीन बढ़ गई। 2017 में कैबिनेट से पास है कि वेटनरी कॉलेज की जमीन लीज नहीं होगी- गुड्डु बाबा 2017 के अप्रैल में इस जमीन का लीज खत्म हो गया था, एक्सटेंशन नहीं हो रहा था। 2025 के विधानसभा चुनाव के पूर्व लीज का एक्सटेंशन किया गया है, जबकि वेटनरी कॉलेज की जमीन 2017 में कैबिनेट से पास हुआ कि वेटनरी कॉलेज की जमीन किसी भी तरह से लीज नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद प्रभावशाली लोगों द्वारा कौटिल्या नगर वेटनरी कॉलेज की जमीन को निजी संपत्ति बना लिया गया है। ————————- ये भी पढ़ें पटना में लालू का आलीशान बंगला, पहली तस्वीर देखिए:राबड़ी आवास छूटा तो यहीं शिफ्ट हो सकती है फैमिली; 5 साल से चल रहा काम लालू परिवार राबड़ी आवास खाली करने के मूड में नहीं है। सरकार ने पिछले दिनों उनको हार्डिंग रोड-39 नंबर बंगला अलॉट किया है। 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास में लालू-राबड़ी दो दशक से रह रहे हैं और अपने सुख-दुख बिताए हैं। यहां राजनीतिक तूफान उठे और थमे। इस आवास से लालू यादव ने कई फैसले भी लिए, जो पार्टी और संगठन को काफी मजबूत किया। पूरी खबर पढ़ें


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