लखनऊ स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में छात्रावास दिवस का समापन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजित समारोह में छात्रों ने उत्साह और अनुशासन का प्रदर्शन किया, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का संचालन सृष्टि शर्मा और समृद्धि देशपांडे ने किया। समारोह की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण से हुई, जिसे धृति चिमिरे और सुमेधा आर्या ने प्रस्तुत किया। इसके बाद लौकिक मंगलाचरण, सरस्वती वंदना, कुलगीत और वंदे मातरम् की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। मुकुल कुमार ने रिकॉर्डिंग के माध्यम से एक विशेष प्रस्तुति दी, जबकि विद्योत्तमा, सोनम, सुमेधा और रोली ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सामूहिक गान प्रस्तुत किया सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला सामूहिक नृत्य से शुरू हुई, जिसमें छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समृद्धि देशपांडे ने मराठी गीत पर एकल गायन प्रस्तुत किया। प्रियंसी और शिखा तिवारी ने एकल नृत्य से दर्शकों का मन मोहा, वहीं सुभदा, सुमेधा और रोली ने सामूहिक गान प्रस्तुत किया। मंच पर विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। धृति भिमिरे और प्रतीक्षा सरकार ने नेपाली नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि हिमाचली और मैथिली गीतों ने क्षेत्रीय संस्कृति को दर्शाया। आदित्य तिवारी, माधवेश, कृष्णा पी. और उनके साथियों ने पंजाबी भांगड़ा से जोश भरा। आनंदी, प्रतीक्षा, प्रेरणा, रुचि, वैष्णवी और कशिश ने राजस्थानी कालबेलिया और घूमर नृत्य प्रस्तुत किया। छात्रावास विद्यार्थियों के समग्र विकास का आधार आराध्या मिश्रा ने भजन प्रस्तुत कर भक्तिमय माहौल बनाया। पौरुष, उत्कर्ष और करण ने उत्तर प्रदेश के नृत्य से अपनी कला का प्रदर्शन किया। दरबारी तरंग में आनंदी की प्रस्तुति भी सराहनीय रही।समारोह का मुख्य आकर्षण परिसर निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा का अध्यक्षीय आशीर्वचन रहा। उन्होंने छात्रावास जीवन को विद्यार्थियों के समग्र विकास का आधार बताया। प्रो. झा ने कहा कि छात्रावास में रहकर छात्र आत्मनिर्भरता, अनुशासन और समय प्रबंधन सीखते हैं, जो उनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को जीवन में मिलने वाले अवसरों का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी।कार्यक्रम का समापन प्रमाणपत्र और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

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