किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने टीबी उन्मूलन की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केयर के तत्वाधान में हाईवे हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के सहयोग से टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 25 टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लिया गया। उन्हें पोषण पोटली प्रदान की गई। एक टीवी मरीज 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है विभागाध्यक्ष डा. सूर्यकान्त ने कहा कि टीबी रोगियों के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज भी टीबी मरीजों, खासकर महिलाओं और बच्चों को परिवार व समाज से अकेलापन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। बच्चों के मामले में तो अन्य बच्चे उनके साथ बैठने या खेलने से भी कतराते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। मरीजों को इस समय परिवार और समाज के सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। डा. सूर्यकान्त ने जोर देकर कहा टीबी को छुपाएं नहीं, बल्कि सावधानी बरतें। बाहर निकलते समय मरीज और उनके परिजनों को मास्क जरूर लगाना चाहिए। भीड़-भाड़ से जितना हो सके दूर रहें। एक टीबी मरीज खांसने या छींकने से कम से कम 15 नए लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए बातचीत और संपर्क में सावधानी बरतनी चाहिए। लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं उन्होंने लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया अगर दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, बलगम या खून वाली खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने या खांसते समय दर्द, सांस फूलना, लंबे समय तक बुखार, रात में पसीना, थकान, भूख न लगना और बिना वजह वजन घटना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी टीबी केंद्र, जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं। सबसे महत्वपूर्ण सलाह देते हुए डा. सूर्यकान्त ने कहा कि टीबी का पूरा कोर्स पूरा करें, दवा बीच में कभी न छोड़ें। ऐसा करने से मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (MDR) टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसका इलाज मुश्किल और महंगा होता है तथा जान भी जा सकती है। 500 मरीजों को गोद ले चुका विभाग केजीएमयू कुलपति डा. सोनिया नित्यानन्द ने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए डा सूर्यकान्त को बधाई दी। उन्होंने कहा कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग निक्षय मित्र योजना में अव्वल है और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है। ऐसी पहल न सिर्फ मरीजों को पोषण और चिकित्सकीय सहायता देती है, बल्कि उनके मनोबल को भी मजबूत करती है, जो टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी। डा. सूर्यकान्त ने बताया कि अब तक विभाग द्वारा 500 से ज्यादा टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है। 15 ग्राम पंचायत में काम कर रहा केजीएमयू वर्ष 2019 से एक गांव और एक स्लम एरिया को भी गोद लिया गया है। केजीएमयू ने अब तक लगभग 15 ग्राम पंचायतों को गोद लिया है। निक्षय मित्र योजना के जरिए समाज के विभिन्न वर्ग टीबी मरीजों की मदद कर सकते हैं, जो टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को मजबूत बनाती है। कार्यक्रम में केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग से डा. अंकित कुमार, हाईवे हॉस्पिटल के प्रबंधक डा. मनोज कुमार सिंह, विवेक सिंह, अंजनेय सिंह, रजनी मिश्रा, सोनाली विश्वकर्मा, एनटीईपी टीम के एसटीएस अमन भारती, टीबीएचवी बृजेंद्र सिंह, ममता जोशी, एसटीएलएस जे.पी. तिवारी, एलटी संदीप मौर्य, मेडिकल ऑफिसर डा. देवरत, जूनियर डॉक्टर्स और समस्त स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।

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