कुशीनगर में स्कूली वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, एआरटीओ मो. अजीम के निर्देशन में शुक्रवार को रविंद्रनगर स्थित एआरटीओ कार्यालय में एक विशेष कैंप आयोजित किया गया। यह कैंप सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला। इसमें कुल 130 स्कूली वाहनों का भौतिक और तकनीकी निरीक्षण किया गया। साथ ही, सभी 130 चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया। स्वास्थ्य शिविर में नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को हेल्थ कार्ड जारी किए गए। निरीक्षण के दौरान 125वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 5वाहन मानकों पर खरे नहीं उतरे। संबंधित विद्यालय प्रबंधन को 15 दिन के भीतर इन कमियों को दूर कर वाहनों को मानक के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनपद में संचालित सभी स्कूली वाहनों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही संचालित करना अनिवार्य है। जांच के दौरान यदि कोई वाहन मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्कूली वाहनों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का पालन सभी स्कूलों और वाहन संचालकों के लिए अनिवार्य है। इन नियमों के अनुसार, स्कूल बस या वैन के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट होना आवश्यक है। वाहन में फर्स्ट-एड बॉक्स, फायर एक्सटिंग्विशर और इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य हैं। ड्राइवर प्रशिक्षित, अनुभवी और पुलिस द्वारा सत्यापित होना चाहिए। छोटे बच्चों के लिए वाहन में एक अटेंडेंट (हेल्पर) की व्यवस्था जरूरी है। बस पर “SCHOOL BUS” स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए और उसका रंग पीला निर्धारित है। स्पीड गवर्नर और जीपीएस सिस्टम लगाना भी आवश्यक है। ओवरलोडिंग पर पूरी तरह रोक है। कई राज्यों में सीसीटीवी कैमरा और आपातकालीन नंबर भी अनिवार्य किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का पालन न करने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस जांच अभियान के दौरान परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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