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किडनैपर चाचा 12 दिन तक करता रहा नाटक:प्रयागराज में अगवा मासूम के घर के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा, पुलिस पर रखे रहा नजर

प्रयागराज के मांडा में एलकेजी के छात्र की किडनैपिंग का मास्टरमाइंड 12 दिन तक पुलिस को गुमराह करता रहा। पहले दो दिन तक वह परिवारवालों के साथ मिलकर बच्चों को ढूंढने का नाटक करता रहा। इसके बाद गांव में ही बच्चे के घर के इर्द-गिर्द घूम टहलकर पुलिस को भी चकमा देने की कोशिश करता रहा और एक-एक एक्टिविटी पर नजर रखे रहा। घरवालों के साथ रहकर करता रहा ‘ड्रामा’
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किडनैपिंग के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वालों में उज्जवल भी शामिल था। उसने खुद को परिवार के साथ जोड़कर पूरी तरह भरोसे में लिया। वह रात भर बच्चे के दादा के साथ घूमता रहा। घरवालों के साथ मिलकर तलाश का दिखावा करता रहा। पुलिस को अलग-अलग झूठी लीड देकर गुमराह करता रहा। यहां तक कि बच्चे के बरामद होने के बाद भी वह रोज घर आता-जाता रहा और हर गतिविधि पर नजर बनाए रखता था। पुलिस-परिवार की हर अपडेट साथियों तक पहुंचाता रहा
उज्जवल गांव में ही रहकर लगातार अपने साथियों को सूचना देता रहा। पुलिस की कार्रवाई, दबिश और जांच की दिशा की जानकारी देता था। घरवालों की बातचीत और मूवमेंट पर नजर रखता था।
गांव में अफवाह फैलाकर जांच को भटकाने की कोशिश भी की
सूत्रों के मुताबिक, उसने दबी जुबान से गांव में अफवाहें भी फैलाई। वह कभी परिवार की निजी रंजिश की बात छेड़ता, तो कभी अन्य एंगल बनाकर पुलिस को भ्रमित करता था।
एसओजी लगने की खबर से घबराया, बदल दिया प्लान
जैसे ही उसे पता चला कि मामले में एसओजी समेत कई टीमें लग गई हैं और पुलिस तेजी से करीब पहुंच रही है, वह घबरा गया। इसके बाद उसने अपने साथियों से संपर्क कर प्लान बदलने को कहा। इसके बाद बच्चे की मां का नंबर साथियों को दिया, एक पर्ची पर नंबर लिखवाया और बच्चे को वाराणसी के गेस्ट हाउस के पास छोड़ने का निर्देश दिया। उसके कहने पर ही उसके साथी बच्चे को सुरक्षित छोड़कर फरार हो गए।
किडनैपिंग में इस्तेमाल गाड़ियों का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात में दो गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ था। अपहरण में इस्तेमाल ऑल्टो कार राजकुमार पांडे की थी, जिसे उसने कुछ महीने पहले करेली से सेकेंड हैंड खरीदा था, लेकिन ट्रांसफर नहीं कराया था। दूसरी कार होंडा सिटी गाजीपुर निवासी प्रशांत राय की बताई जा रही है, जो अभी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
‘यकीन था जमीन बेचकर दे देंगे 20 लाख’
पूछताछ में उज्जवल ने बताया कि उसे पूरा भरोसा था कि परिवार बच्चे की जान बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएगा। पिता भले गार्ड की नौकरी करता हो, लेकिन जमीन बेचकर पैसे देगा। परिवार गरीब होने के कारण पुलिस में ज्यादा नहीं जाएगा। चुपचाप फिरौती देकर मामला खत्म करेगा। इसी सोच के तहत उसने 20 लाख रुपये की फिरौती का प्लान बनाया था। पुलिस की नजर में बेहद शातिर आरोपी
पूरे मामले में उज्जवल की भूमिका को पुलिस बेहद शातिर मान रही है। अब तक कि जांच में सामने आया है कि उसने खुद मौके पर रहकर जांच भटकाई
परिवार का भरोसा जीता। पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखी। साथियों को लगातार निर्देश देता रहा। फिलहाल मास्टरमाइंड समेत चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि प्रशांत राय की तलाश जारी है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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