मणिकर्णिका घाट स्थित महाश्मशाननाथ बाबा का वार्षिक शृंगारोत्सव चैत्र नवरात्र में पंचमी से सप्तमी तिथि तक होगा। इसके अंतर्गत 23 से 25 मार्च तक विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। अंतिम संध्या में नगरवधुएं नृत्यांजलि अर्पित करेंगी। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 23 मार्च को पहले दिन शास्त्रोक्त विधि से रुद्राभिषेक, शृंगार, पूजन और आरती होगी। इसी क्रम में 24 मार्च को दूसरे दिन पूर्वाह्न 11 से शाम चार बजे तक भंडारा होगा। रात में भजन गंगा बहेगी। कार्यक्रम का अंतिम दिन 25 मार्च को होगा। बाबा का तंत्रोक्त विधि से पंचमकार पूजन-अर्चन किया जाएगा। संध्या शृंगार आरती के बाद शाम साढ़े सात बजे से नगरवधुएं नृत्यांजलि अर्पित करेंगी। राजा मानसिंह ने शुरू कराई थी परंपरा मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने प्राचीन नगरी काशी में भगवान शिव के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इस मौके पर राजा मानसिंह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराना चाह रहे थे, लेकिन कोई भी कलाकार इस श्मशान में आने और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं हुआ। इसकी जानकारी काशी की नगरवधुओं को हुई तो वे स्वयं ही श्मशान घाट पर होने वाले इस उत्सव में नृत्य करने को तैयार हो गईं। इस दिन से धीरे-धीरे यह उत्सवधर्मी काशी की ही एक परंपरा का हिस्सा बन गई। तब से आज तक चैत्र नवरात्रि की सातवीं निशा में हर साल यहां श्मशानघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

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