कन्नौज में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान अफसरों के न पहुंचने पर यूपी सरकार के मंत्री नाराज हो गए। पौन घण्टे इंतजार करने के बाद वह कार्यक्रम शुरू कराए बिना ही दलबल के साथ चले गए। हालांकि कुछ देर बाद ही डीएम-एसपी वहां पहुंच गए। माजरा समझते ही अफसरों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं। मान-मनौव्वल के बाद भी न तो मंत्री कार्यक्रम में पहुंचे और न ही भाजपा का कोई नेता पहुंचा। कन्नौज के रोमा स्मारक में गुरुवार शाम 5:30 बजे डिस्कवर योर रूट्स (अपनी जड़ों को खोजें) कार्यक्रम होना था। प्रदेश सरकार के 9 वर्ष पूरे होने पर सांस्कृतिक विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को शामिल होना था। वह शाम 5:15 बजे अपनी पत्नी ज्योत्सना के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए, लेकिन वहां कोई अधिकारी उन्हें नजर नहीं आए। मंत्री असीम अरुण के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष वीरसिंह भदौरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत, भाजयुमो जिलाध्यक्ष अभिमन्यु ठाकुर कुछ अन्य नेता व कार्यकर्ता भी कार्यक्रम स्थल पर बैठकर अधिकारियों का इंतजार करने लगे, ताकि कार्यक्रम शुरू कराया जा सके। पौन घण्टे तक समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने अधिकारियों के आने का इंतजार किया, लेकिन अफसरों के न पहुंचने पर उनका पारा चढ़ गया। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही वह नेताओं के साथ वहां से निकल गए। हालांकि मंत्री के जाते ही डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी बिनोद कुमार, एडीएम देवेंद्र कुमार, एसडीएम वैशाली कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए। जब अधिकारियों को मंत्री असीम अरुण के नाराज होकर जाने की जानकारी मिली तो उनके चेहरों की हवाइयां उड़ गईं। समाज कल्याण मंत्री के करीबी माने जाने वाले प्रवीण टण्डन के जरिए नेताओं को मानने के प्रयास किए गए। इसके बाद भी जब कोई नेता कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचा तो डीएम के निर्देश पर कार्यक्रम कराया गया। हालांकि इस कार्यक्रम में अधिकारी-कर्मचारी और स्टूडेंट्स ही रहे। मामले को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष वीरसिंह भदौरिया ने बताया कि हम लोग पौन घण्टे इंतजार करते रहे, लेकिन कोई अधिकारी रोमा स्मारक में नहीं पहुंचा। इसलिए हम लोग भी वहां से चले आए। जब उनसे पूछा कि अधिकारी आ गए हैं, क्या अब आप लोग आएंगे? इस पर जिलाध्यक्ष ने जवाब दिया कि मेरे नेता (असीम अरुण- समाज कल्याण मंत्री) वहां से चले आए तो अब लोग भी वहां नहीं जाएंगे। हालांकि इस मामले में अफसरों ने चुप्पी साध ली है। अधिकारियों और मंत्री के बीच इस नाराजगी को लेकर राजनीतिक गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएं होने लग गईं।

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