कानपुर में किडनी रैकेट का खुलासा करने के लिए पुलिस को लोकल इंटेलीजेंस यूनिट (LIU), क्राइम ब्रांच और साइवर सेल को एक्टिव करना पड़ा। इन टीमों में करीब 1 महीने तक काम किया, जिसके बाद पूरे रैकेट को एक्सपोज किया गया। किडनी रैकेट की सरगना डॉक्टर प्रीति आहूजा और उसके पति डॉक्टर सुरजीत आहूजा काफी रसूख वाला है। यही कारण रहा कि छोटे डॉक्टर आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे और कई बार अधिकारी भी उसके काले कारनामों पर ध्यान नहीं देते थे या कार्रवाई से बचते थे। डॉक्टर प्रीति आहूजा कई बड़े संगठनों से जुड़ी हुई है। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की शहर इकाई में उपाध्यक्ष पद है। किडनी रैकेट में डॉक्टर प्रीति का नाम आने के बाद सभी संगठन कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। जानिए प्रीति आहूज IMA के साथ और किस संगठन से जुड़ी हैं… किडनी रैकेट की सरगना डॉक्टर प्रीति आहूजा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात है। ये यहां के कर्मचारियों का इलाज और छुट्टी देने के लिए काम मेडिकल एफिडेविट भी बनाती थी। इसके साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) में शहर की कमेटी में उपाध्यक्ष है। डायबिटीज रोग विशेषज्ञ के संगठन कानपुर डायबिटीज एसोशिएशन (KDA) में सचिव भी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के संगठन फिजीशयन फोरम की भी सदस्य है। इसके साथ शहर भर में डॉक्टर कम्युनिटी के अलग-अलग सामाजिक और मेडिकल कार्यक्रमों में सम्मिलित होती थी। हालांकि कानपुर की IMA टीम डॉक्टर प्रीति आहूजा पर कुछ भी बात करने में बच रही है। IMA के सूत्रों की मानें तो जब तक कोर्ट से प्रीति आहूजा को किडनी रैकेट में दोषी नहीं पाया जाएगा, तब तक IMA कार्यवाही करने से बचेगा। अस्पताल में 1 साल से किडनी ट्रांस्प्लांट का खेल चल रहा डॉ. प्रीति आहूजा MBBS, MD (मेडिसिन) हैं। अस्पताल कल्याणपुर के केशवपुरम, मसवानपुर चौराहा के पास स्थित है। आहूजा हॉस्पिटल पांच मंजिला इमारत में बना हुआ है और इसमें करीब 35 बेड की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल में जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी), पीडियाट्रिक्स, ईएनटी, चेस्ट, एलर्जी, सर्जिकल और एनेस्थीसिया जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता है। यह अस्पताल करीब दो साल पहले शुरू हुआ था, जबकि पुलिस के अनुसार यहां पिछले एक साल से अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली महिला की तबीयत लगातार बिगड़ रही कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खुलासे के बाद अस्पताल के सीएमएस सौरभ अग्रवाल ने बताया- जिस महिला का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है, उसकी हालत लगातार बिगड़ रही है। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। शरीर में क्रिएटिनिन (किडनी खराब होने का संकेत) का स्तर बढ़ गया है। साथ ही उसका हीमोग्लोबिन बहुत कम (करीब 5.5–6) हो गया है, जो खतरनाक स्थिति है। जांच में शरीर में इन्फेक्शन के संकेत भी मिले हैं। डॉक्टरों को यह भी शक है कि शरीर नई किडनी को स्वीकार नहीं कर रहा (ग्राफ्ट रिजेक्शन), जो गंभीर समस्या है। ऐसे में मरीज और उसकी किडनी को बचाने के लिए उसे तुरंत ऐसे बड़े और मान्यता प्राप्त अस्पताल में शिफ्ट करना जरूरी है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बेहतर सुविधा और निगरानी उपलब्ध हो। अब जानिए किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाली महिला पारुल के बारे में.. पारुल तोमर मुजफ्फरनगर के नॉर्थ सिविल लाइंस की रहने वाली हैं। पारुल तोमर के पति विकास मेरठ में कक्षा 8 तक स्कूल चलाते हैं। पारुल का एक 19 वर्षीय बेटा है। वहीं, एक छोटी बेटी है। बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवार मेरठ शिफ्ट हो गया था। सूत्रों की माने तो किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा 80 लाख में तय हुआ था। ट्रांसप्लांट के दौरान पारुल का भाई मौजूद था। हालांकि पुलिस ने उससे भी पूंछताछ की है। पारुल के पति से अभी बात नहीं हो पाई है।

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