कानपुर देहात में गेहूं की फसल पककर तैयार होने के साथ ही आग लगने की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी कपिल सिंह के निर्देश पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने किसानों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय फायर सीजन का है, जिसमें खेतों और खलिहानों में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इन निर्देशों का उद्देश्य किसानों को फसल कटाई के दौरान संभावित अग्निकांडों से बचाना है। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसानों को फसल की कटाई पहले सुरक्षित स्थानों से करनी चाहिए। बिजली के तारों और पोल के नीचे की फसल बाद में काटी जाए। खलिहान बिजली लाइनों से कम से कम 20 फीट और आबादी से 100 फीट दूर बनाए जाएं। ट्रांसफार्मर या विद्युत लाइन के नीचे खलिहान बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। हार्वेस्टर मशीन के ब्लेड की नियमित सफाई आवश्यक है, क्योंकि कंकड़-पत्थर से चिंगारी निकल सकती है। मशीन को यथासंभव पानी के स्रोत के पास चलाएं। खलिहान हमेशा तालाब, कुएं या जल स्रोत के पास बनाने की सलाह दी गई है। मड़ाई के दौरान धूम्रपान प्रतिबंधित आग से बचाव के लिए कटाई और मड़ाई के दौरान धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित रखें। बीड़ी-सिगरेट को पूरी तरह बुझाकर ही नष्ट करें। हुक्का-चिलम का प्रयोग करते समय भी सतर्कता बरतें। खेतों के पास खाना बनाने या आग जलाने से बचें। माचिस व ज्वलनशील सामग्री बच्चों से दूर रखी जानी चाहिए। ट्रैक्टर के साइलेंसर में स्पार्क अरेस्टर (चिंगारी रोधक यंत्र) लगाना अनिवार्य किया गया है। सूखे तालाबों को ट्यूबवेल या नहर से भरकर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आग लगने पर तुरंत पानी उपलब्ध हो सके। इसके अतिरिक्त, विद्युत विभाग को ढीले और जर्जर तारों की तत्काल मरम्मत करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि बिजली के तारों से होने वाली आग की घटनाओं को रोका जा सके।

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