कानपुर के डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने शनिवार को नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) और क्षयरोग केंद्र पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दो डॉक्टर समेत पांच स्वास्थ्य कर्मी यूपीएचसी से नदारद मिले। इसके बाद डीएम ने दोनों डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही नदारद स्वास्थ्य कर्मियों का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया है। इसी परिसर में बने क्षय रोग केंद्र का भी निरीक्षण किया, यहां पर 11 कर्मचारियों में से पांच अन्य जगह अटैच होने पर सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगा है। अनुपस्थित होने के बाद भी रजिस्टर में डॉक्टर की प्रेजेंट मिली डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह के औचक निरीक्षण के दौरान नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर विवेक सोनकर उपस्थित मिले, जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. स्मिता सिंह नदारद थीं, उपस्थिति पंजिका के परीक्षण में विकास, विकास यादव, अमित कुमार, डॉ. श्रेया सचान और अमन शुक्ला भी अनुपस्थित मिले। इस पर डीएम ने सख्त एक्शन लेते हुए सीएमओ को सभी अनुपस्थित कार्मिकों के खिलाफ एक्शन लेने का आदेश दिया। इस दौरान ओपीडी रजिस्टर की भी जांच की गई। 27 मार्च की प्रविष्टियों में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. स्मिता सिंह के हस्ताक्षर दर्ज मिले, जबकि जानकारी दी गई कि वह उस दिन प्रशिक्षण में थीं। इस संबंध में जानकारी लेने पर यह तथ्य सामने आया कि मरीजों का विवरण डॉ. विवेक सोनकर द्वारा अंकित किया गया था। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच कर एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सीएमओ को दिया। 60 फीसदी स्टाफ दूसरी जगह अटैच, सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगा इसके बाद डीएम ने इसी परिसर में संचालित क्षयरोग केंद्र का निरीक्षण किया। यहां कुल 11 कर्मचारियों में से 5 दूसरी जगह अटैच होने की जानकारी होने पर उन्होंने गंभीर नाराजगी जताई और सीएमओ से दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया। साथ ही निर्देश दिया कि संबंधित स्टाफ को मूल तैनाती स्थल पर वापस लाया जाए, जिससे मरीजों को समुचित उपचार मिल सके। टीबी के मरीजो को भर्ती करके इलाज का आदेश निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को बताया गया कि कोविड काल से पहले टीबी मरीजों को केंद्र में भर्ती कर उपचार दिया जाता था, जो वर्तमान में बंद है। इस पर उन्होंने भर्ती वार्ड व्यवस्था दोबारा शुरू करने और आवश्यक सुविधाएं बहाल करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित मॉनीटरिंग करने का आदेश दिया। कोई भी कमी या अनियमितता मिले, उसका त्वरित निस्तारण कराने का आदेश दिया।

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