स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिये खर्च की गई रकम की एक लिस्ट जारी की, जिसमें कानपुर महानगर कांग्रेस ने भी शहर में हुए कार्यों की हकीकत को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। तिलक हाल में एक बैठक में महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कानपुर के लिए आवंटित 490 करोड़ रुपये के उपयोग पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब तक शहरवासियों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक कानपुर को ‘स्मार्ट सिटी’ नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की हालत जमीनी स्तर पर बेहद खराब है। “हर सड़क पर गड्ढे, जगह-जगह कूड़े के ढेर, जलभराव, ट्रैफिक जाम और आवारा जानवरों की समस्या आम हो चुकी है,
पवन गुप्ता ने केंद्र की स्मार्ट सिटी मिशन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह योजना अपने उद्देश्य से भटक गई है। सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन हकीकत में योजना खोखली साबित हुई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में राहुल गांधी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में बताया गया कि देशभर में करीब 48,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 97% प्रोजेक्ट पूरे होने का दावा किया गया। वहीं कानपुर में 490 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई, लेकिन शहर की स्थिति इससे मेल नहीं खाती।
उन्होंने कई सवाल उठाए स्मार्ट सिटी का मानक क्या है, सफलता किस आधार पर तय की गई, कानपुर में वास्तविक बदलाव कितना हुआ और आम लोगों के जीवन में क्या सुधार आया?
कांग्रेस का आरोप है कि शहर में टूटी सड़कें, खुले सीवर, दूषित पानी और धंसती सड़कों जैसी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
उन्होंने कानपुर के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से 490 करोड़ रुपये का हिसाब देने की मांग की।
बैठक में हरप्रकाश अग्निहोत्री, निजामुद्दीन खान, इकबाल अहमद, राजू साहू, रितेश यादव, अजय तिवारी, अजय श्रीवास्तव ‘शीलू’, पद्म मोहन मिश्रा, धर्मेंद्र चौहान, विनोद अवस्थी और बृजभान राय सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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