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कानपुर की मोहिनी का कमाल:50 रुपये के ऊन से बुना ‘ग्लोबल’ कारोबार, अफ्रीका और US तक जा रहे हैंडमेड फूल और खिलौने

आज के दौर में जब मशीनें हर तरफ हावी हैं, कानपुर की एक बेटी ने ‘हुनर और सुई-धागे’ के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज़ाद नगर की रहने वाली मोहिनी ने ‘अकल्पम’ नाम से एक ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया है, जिसके हाथ से बने (हैंडमेड) प्रोडक्ट्स की डिमांड अब सिर्फ गलियों तक सीमित नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका और अफ्रीका तक पहुंच गई है। महज 50 रुपये से शुरुआत, टर्नओवर लाखों में अक्सर लोग सोचते हैं, कि बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों का निवेश चाहिए, लेकिन मोहिनी के प्रोडक्ट्स की रेंज महज 50 रुपये से शुरू होती है। इसमें होम डेकोर से लेकर बच्चों के लिए खास खिलौने और एक्सेसरीज शामिल हैं। मोहिनी बताती हैं कि उनका सालाना टर्नओवर अब डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच रहा है। यह सब मुमकिन हुआ है उनके हुनर और सही मार्केटिंग की बदौलत। ‘यूज एंड थ्रो’ नहीं, ‘वॉशेबल’ है खूबी मोहिनी के स्टॉल पर सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र हैं क्रोशिया से बने रंग-बिरंगे फूल। गुलाब और ट्यूलिप के ये फूल इतने जीवंत दिखते हैं कि पहली नजर में असली लगें। बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक के शोपीस के मुकाबले मोहिनी के प्रोडक्ट्स की खासियत उनका टिकाऊ होना है। मोहिनी कहती हैं, “हमारे प्रोडक्ट्स पूरी तरह वॉशेबल हैं। इन्हें आप बार-बार इस्तेमाल कर सकते हैं, ये खराब नहीं होते। यह ‘यूज एंड थ्रो’ वाला कचरा नहीं है। सोशल मीडिया बना कामयाबी का जरिया
सिर्फ कानपुर या लखनऊ ही नहीं, मोहिनी के पास चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों से भी बल्क ऑर्डर आते हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में मोहिनी ने अपने बिजनेस को इंस्टाग्राम के जरिए ऑनलाइन भी जोड़ दिया है। जो ग्राहक दूर बैठे हैं, वे इंस्टाग्राम पर जाकर अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड (पसंद के अनुसार) ऑर्डर दे सकते हैं।

सस्टेनेबल बिजनेस की ओर कदम
मोहिनी का ब्रांड ‘अकल्पम’ सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली उत्पादों पर जोर देता है। ऊन और सूती धागों का उपयोग पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता और स्थानीय कारीगरी को भी बढ़ावा देता है। मोहिनी की यह कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो घर बैठे अपने हुनर को एक बड़े ब्रांड में बदलना चाहती हैं। जानिए स्टॉल पर क्या-क्या है खास…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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