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कलाकारों ने रंगों के माध्यम से जीवन के आयामों को कैनवास पर किया जीवंत

सिटी रिपोर्टर| बेगूसराय कंकौल स्थित सभागार में 29 से 31 दिसंबर 2025 तक आयोजित समकालीन कला पर आधारित समूह कला प्रदर्शनी को 1 जनवरी को भी जारी रहा। नववर्ष के प्रथम होने के कारण दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस दौरान साहित्य, रंगमंच एवं कला से जुड़े प्रबुद्धजनों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कलाकारों की कृतियों की सराहना की। प्रसिद्ध साहित्यकार प्रदीप बिहारी ने साहित्य और चित्रकला के काव्यात्मक संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रदर्शनी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। वहीं रंगकर्मी दीपक सिन्हा ने कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जिले को सांस्कृतिक रूप से और समृद्ध करेंगे। रंगकर्मी चंदन वत्स ने इस प्रदर्शनी को बेगूसराय के कला जगत के लिए “स्वर्णिम समय” बताया। केंद्रीय विद्यालय की सेवानिवृत्त शिक्षिका अनुपमा कुमारी ने कहा कि विभिन्न माध्यमों में बनी कलाकृतियों को एक साथ देखना एक अद्भुत और स्मरणीय अनुभव है। साथ ही कहा कि चार दिनों तक चली इस कला प्रदर्शनी ने बेगूसराय के कला जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। कला आयोजनों से युवाओं को प्रेरणा मिलती है कार्यक्रम के सफल संचालन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी का मार्गदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। इसके अतिरिक्त कला जगत के समर्पित लोगों में इंद्रमोहन प्रसाद, मनीष कौशिक, प्रवीण कुमार, राजीव कुमार शर्मा, वीरेंद्र नागर एवं मनोज साह की सक्रिय भूमिका ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समापन समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बेगूसराय जैसे शहर में इस प्रकार के कला आयोजनों से युवाओं को प्रेरणा मिलती है। समारोह के अंत में सभी प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे कला आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया गया। वहीं कला संस्कृति पदाधिकारी श्याम सहनी ने बताया कि यह आयोजन न केवल बेगूसराय, बल्कि बिहार के कला परिदृश्य पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से जीवन के विविध आयामों को कैनवास पर जीवंत किया। साथ ही शहर के गणमान्य व्यक्तियों और कला प्रेमियों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर कलाकारों की रचनात्मक सोच और बारीकियों की सराहना की। इस अवसर पर आए दर्शकों ने भी इसकी भरपुर सराहना करते हुए इस प्रकार की प्रदर्शनी स्थानीय कला को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज को नई दृष्टि प्रदान करने वाला बताया। प्रदर्शनी की सफलता के पीछे एक सशक्त सामूहिक प्रयास रहा।


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