मुरादाबाद में करोड़ों की जीएसटी चोरी कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े फर्जी बिल ट्रेडिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। एसआईटी (अपराध शाखा) ने इस मामले में मुख्य आरोपी भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान और उसके सहयोगी रविंद्र को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किए गए हैं। राज्य कर विभाग के अधिकारी सुनील कुमार डागर (एसटीओ) की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा ‘मुनी जी ट्रांसपोर्ट’, अविराज ट्रेडिंग और विद्या ट्रेडर्स जैसी बोगस फर्मों के दस्तावेजों के आधार पर दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया था कि फर्जी बिलों के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। फर्जी दस्तावेज के जरिए करता था काम वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर गठित एसआईटी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी भगवान सिंह और उसके सहयोगी रविंद्र को पकड़ा। पुलिस ने दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में बढ़ोतरी करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी भगवान सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2024 से विभिन्न राज्यों से स्क्रैप की गाड़ियों को पास कराने का ठेका लेता था। इसके लिए वह व्यापारियों से मोटी रकम वसूलता था और उन्हें फर्जी बिल्टी, ई-वे बिल व अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराता था। इस काम में उसका सहयोगी रविंद्र कंप्यूटर के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और उन्हें व्हाट्सएप के जरिए भेजता था। आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने अब तक लगभग 33 फर्जी फर्में बनाई हैं। इनमें से कुछ फर्में हरियाणा के एक व्यक्ति राहुल द्वारा उपलब्ध कराई गई थीं। वर्तमान में वह ‘मांझी एंटरप्राइजेज’ और ‘श्री बाबा ट्रेडर्स’ के नाम से फर्जी बिल्टी और जीएसटी दस्तावेज तैयार कर व्यापारियों को दे रहा था। पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में मंडी गोविंदगढ़ निवासी हेमंत भी शामिल है, जो कमीशन के लेन-देन में मदद करता था। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

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