संभल के विवादित धार्मिक स्थल के निकट कब्रिस्तान की भूमि पर हुए निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 06 मई को निर्धारित की गई है। इस मामले में निचली अदालत से भी पहले से यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी हैं। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने वादी पक्ष और सरकार को अगली सुनवाई की तिथि तक साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया है। यह मामला संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित श्रीहरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद के निकट 8 बीघा कब्रिस्तान की गाटा संख्या 32/2 से संबंधित है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अली अशरफ सहित 18 लोगों के निर्माण का हवाला देते हुए याचिका दायर की गई थी। अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक त्रिपाठी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। हाईकोर्ट का यह आदेश 25 मार्च को जारी हुआ, जिसकी जानकारी शुक्रवार शाम को पोर्टल पर अपलोड होने के बाद अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी ने दी। इसी मामले में न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिवीजन) संभल में सलमा रानी पत्नी शहाबुद्दीन सहित 15 लोगों ने वाद दायर किया था। इसमें नगर पालिका परिषद संभल के अधिशासी अधिकारी, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ, जिलाधिकारी और तहसीलदार संभल को पक्षकार बनाया गया है। न्यायाधीश ललित कुमार ने 27 फरवरी को सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित है। शाही जामा मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष काशिफ खान ने शुक्रवार को बताया कि मस्जिद के निकट कब्रिस्तान पर बने मकान और दुकान के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे मिला है। उन्होंने बताया कि 06 मई को सुनवाई के लिए राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया है। गौरतलब है कि 30 दिसंबर को हुई पैमाइश में इस भूमि पर कब्जा पाया गया था। कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण करने की शिकायत पर प्रशासन ने पैमाइश की, इसके बाद यह प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट गया, बेंच ने तहसीलदार न्यायालय में चल रही सुनवाई में अपना पक्ष के रखने लिए वापस भेज दिया, इसी के साथ कोई रिलीव नहीं मिला, लेकिन अब यथास्थिति के आदेश हुए हैं।

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