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औरंगाबाद कोर्ट ने कलेक्ट्रेट की कुर्की का आदेश दिया:15 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश; मुआवजे के भुगतान में देरी से जुड़ा है मामला

औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के सिविल जज सीनियर डिविजन प्रथम डॉ. दीवान फहद की अदालत ने कलेक्ट्रेट को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। फैसला डिक्री के अनुपालन में विफलता को गंभीर मानते हुए लिया गया है। दरअसल, यह मामला भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के भुगतान में अत्यधिक देरी से जुड़ा है। न्यायिक आदेश की लगातार अवहेलना पर व्यवहार न्यायालय के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने आदेश का पालन नहीं होने पर जिला कलेक्ट्रेट को कुर्क करने का निर्देश दिया है। अदालती आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। 15 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पुराने इजराय वाद में डिक्री का पालन नहीं किए जाने के कारण की जा रही है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया है कि नियमानुसार कुर्की की कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के भीतर न्यायालय में रिपोर्ट दें। मामला भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा भुगतान का है, जो काफी समय से लंबित पड़ा है। डिक्रीधारी वकील हरेकृष्ण प्रसाद को न्यायालय के पारित आदेश के अनुसार देय राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया। 15 अक्टूबर 2025 को आवेदन दायर किया गया था, जिसके आधार पर 14 नवंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद दिसंबर 2025 में अपर समाहर्ता और विशेष कार्यक्रम सह प्रभारी पदाधिकारी, जिला विधि शाखा कार्यालय से एक रिपोर्ट हासिल हुआ, किंतु उसमें डिक्री राशि के भुगतान का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। 11 दिसंबर 2025 और 5 फरवरी को सरकारी अधिवक्ता (जीपी) की ओर से डिक्री के अनुपालन के लिए समय की मांग की गई थी। न्यायालय ने पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद भुगतान नहीं किए जाने को गंभीर चूक माना। अदालत ने टिप्पणी की कि यह इजराय वाद प्राचीनतम वादों की श्रेणी में आता है। इसके निष्पादन को लेकर उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद डिक्री का अनुपालन नहीं होना न्यायिक आदेशों की अवहेलना है। व्यवहार न्यायालय के सरकारी अधिवक्ता वृजा प्रसाद सिंह ने बताया कि डिक्रीधारी हरेकृष्ण प्रसाद को मुआवजे की राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया, जबकि जिला विधि शाखा को पर्याप्त समय दिया गया था। यहां तक कि शो कॉज के जवाब में भी भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। ऐसे में न्यायालय ने कठोर रुख अपनाते हुए समाहरणालय की कुर्की का आदेश पारित किया। नौ मार्च को होगी अगली सुनवाई न्यायालय ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित अवधि में डिक्री का अनुपालन नहीं किया गया, तो आगे चलकर नीलामी की प्रक्रिया भी की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित की गई है। जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा है कि न्यायालय के आदेश को देखा जा रहा है। विधि सम्मत आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगा। आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें 15 दिनों के भीतर होने वाली कुर्की कार्रवाई और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


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