हॉकी के ड्रिब्लिंग के बादशाह कहे जाने वाले वाले वाराणसी के प्लेयर ओलिंपियन मोहम्मद शाहिद की याद में लालपुर स्टेडियम में संग्रहालय बनाया जा रहा है। हॉकी स्टेडियम के स्टेंड में बने संग्राहलय के हाल में इसका काम शुरू करा दिया गया है। आरएसओ विमला सिंह की पहल पर यह कवायद शुरू की गई है। इस संग्रहालय में भारत को साल 1980 में मास्को ओलिंपिक में मिले स्वर्ण पदक को भी रखा जाएगा। जो मोहम्मद शाहिद को मिला था। साथ ही उनके पद्मश्री सम्मान को भी संरक्षित किया जाएगा। आरएसओ की पहल पर यह कार्य वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा कराया जा रहा है। बता दें की मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन शाहिद कई सालों से अपने पति के नाम पर संग्रहालय की मांग कर रही थीं। इस कार्य को लेकर उन्होंने भी खुशी जताई। जल्द ही मूर्त रूप ले लेगा संग्रहालय आरएसओ विमला सिंह ने बताया – वाराणसी और देश की हॉकी की शान रहे हॉकी के ड्रिब्लिंग मास्टर मोहम्मद शाहिद की याद में लालपुर स्टेडियम में संग्रहालय का काम शुरू हो गया है। जिसे जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा। इस संग्रहालय में उनके द्वारा वर्ष 1980 मास्को ओलंपिक में हॉकी में जीता स्वर्ण पदक भी प्रदर्शित किया जाएगा। 1980 के बाद से भारत ने अभी तक हॉकी में स्वर्ण पदक नहीं जीता है। इसके अलावा मो शाहिद ने देश विदेश में विभिन्न हॉकी प्रतियोगिता में भी कई पदक, और ट्रॉफी जीती हैं। साथ ही यादगार चित्र भी होंगे। उनको भी प्रदर्शित किया जाएगा। उनके द्वारा पहनी गई जर्सी भी इस संग्रहालय में मौजूद रहेगी। पदक के साथ रखा जाएगा पद्मश्री सम्मान आरएसओ ने बताया – मोहम्मद शाहिद ने देश को कई बार गौरवान्वित होने का मौका दिया। ऐसे में उन्हें देश ने पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया। इस संग्राहलय में ये दोनों सम्मान भी रखे जाएंगे। इसके अलावा मोहम्मद शाहिद ने वर्ष 1979 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसी साल मलेशिया में आयोजित फोर नेशन हॉकी टूर्नामेंट में सीनियर भारतीय हॉकी के सदस्य के रूप में खेला। 1982 एशियन गेम्स में रजत पदक और 1986 एशियाड में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। ये सभी पदक यहां प्रदर्शित किए जाएंगे। पदकों को देखकर सीखे लेंगे उदयीमान खिलाड़ी हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ एके सिंह ने बताया – वाराणसी के लालपुर स्टेडियम में हॉकी का हॉस्टल है और अच्छा एस्ट्रो टर्फ है। जिसपर प्रैक्टिस करने के लिए इंटरनेशनल खिलाड़ी भी अक्सर आते हैं। जूनीयर खिलाड़ियों के यहां आने और संग्रहालय को देखने से उनके अंदर भी अच्छा खेलने की भावना जागेगी। सचिव केबी रावत ने बताया – मोहम्मद शाहिद ने 1980 मास्को, 1984 लास एंजेलिस और 1988 सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1979 से 1989 तक 167 अंतरराष्ट्रीय मैच में 66 गोल किया था। 1986 लंदन में आयोजित वर्ल्ड कप हॉकी में इनको सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया था। वर्ष 1985 से 1986 तक भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे थे। हॉकी से रिटायर होने के बाद बरेका में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी पद पर कार्यरत थे।

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