लखनऊ के गोमती नगर स्थित उत्तर प्रदेश भू-स्थानिक निदेशालय में सोमवार को ‘ऑपरेशन द्रोणागिरी’ को पूरे प्रदेश में लागू करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक भारत सरकार की भू-स्थानिक नीति 2022 के तहत गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की पहली बैठक थी, जिसमें परियोजना के विस्तार पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पंधारी यादव ने की। निदेशक डीएन पाठक ने परियोजना की पृष्ठभूमि, महत्व और प्रदेश में इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य आधुनिक तकनीक का उपयोग कर लोगों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करना है। बैठक में वाराणसी से प्राप्त अनुभवों और लाभों पर चर्चा अधिकारियों ने जानकारी दी कि ‘ऑपरेशन द्रोणागिरी’ का पायलट प्रोजेक्ट वाराणसी जिले में सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। बैठक में वाराणसी से प्राप्त अनुभवों और लाभों पर चर्चा की गई, जिसके आधार पर इसे अन्य जिलों में लागू करने की रणनीति बनाई गई।आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. गोपाल दीक्षित ने वाराणसी में किए गए कार्यों की विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह तकनीक कृषि, आजीविका और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार ला सकती है। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बैठक में आईआईटी कानपुर, जीडीआई बेंगलुरु, रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर, सिंचाई, कृषि, परिवहन और राजस्व विभाग सहित कई संस्थानों के अधिकारी उपस्थित थे। सभी ने परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।’ऑपरेशन द्रोणागिरी’ भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य भू-स्थानिक डेटा और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

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