बुलंदशहर में रविवार को “ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, आयुर्वेदिक थेरेपी एंड मैनेजमेंट” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की कि ऑटोइम्यून रोगों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। सेमिनार में इन बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार और प्रबंधन पर चर्चा की गई। यह सेमिनार नुमाइश मैदान स्थित रविंद्र नाट्यशाला में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन, जिला कृषि औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी तथा राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति, आयुष मंत्रालय के एडवाइजर डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय, निखिल भारतवर्षीय आयुर्वेद विद्यापीठ के अध्यक्ष वैद्य ताराचंद शर्मा, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी और कार्यक्रम संयोजक वैद्य हितेश कुमार कौशिक ने दीप प्रज्वलित कर किया। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि वर्तमान में ऑटोइम्यून रोगों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। कार्यक्रम संयोजक एवं क्षारसूत्र-पंचकर्म विशेषज्ञ वैद्य हितेश कुमार कौशिक ने बदलती जीवनशैली और खराब खानपान को इन रोगों के बढ़ने का प्रमुख कारण बताया। आयुर्वेद की उपयोगिता पर प्रकाश डाला सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ. विनय चौधरी ने बताया कि एसएलई (SLE) जैसे ऑटोइम्यून रोगों में आयुर्वेद प्रभावी समाधान प्रदान कर सकता है। वहीं, डॉ. विजय बेरीवाल ने रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार में आयुर्वेद की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। आयुष मंत्रालय के एडवाइजर डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कोई नई बीमारी नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से मौजूद है। उन्होंने बताया कि इन रोगों के उपचार का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों में पहले से उपलब्ध है, जिन्हें आज नए-नए नामों से जाना जा रहा है। वैद्य ताराचंद शर्मा ने जोर दिया कि यदि रोगी समय रहते आयुर्वेदिक उपचार अपनाए तो कोई भी रोग असाध्य नहीं है। डॉ. अच्युत कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ऑटोइम्यून डिसऑर्डर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होते हैं। कार्यक्रम के दौरान श्लोक वाचन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिष्ठा शर्मा ने प्रथम, यीशु भाटी ने द्वितीय तथा वैभव शुक्ला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार द्विवेदी, डॉ. जगन्नाथ हर्यन, डॉ. अलख प्रकाश, डॉ. मंसूर अहमद, डॉ. सुरभि बंसल, डॉ. बॉबी चौधरी, सारंग, प्रत्युष, प्राची सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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