अलीगढ़ की एमपी–एमएलए कोर्ट ने मेवाड़ के शासक महाराणा सांगा के खिलाफ विवादित बयान देने के मामले समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन को नोटिस जारी किया है। उन्हें 10 अप्रैल को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। ये है पूरा मामला अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संरक्षक राजेश चौहान ने अधिवक्ता सतीश कुमार सिंह के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका के अनुसार पिछले वर्ष 21 मार्च को उच्च सदन (राज्यसभा) में रामजीलाल सुमन ने बाबर और महाराणा सांगा के संबंधों को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है, बल्कि क्षत्रिय समाज और सनातनियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। कोर्ट में दी गई दलील के मुताबिक यह बयान राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने और महापुरुषों का अपमान करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इतिहास और साक्ष्यों का दिया हवाला सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। याची राजेश चौहान ने तर्क दिया कि जिस महाराणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को तीन बार पराजित किया था। उन्हें बाबर जैसे आक्रमणकारी की सहायता लेने की कोई आवश्यकता नहीं थी। मेवाड़ एंड मुगल एंपरर पुस्तक का दिया हवाला याची की तरफ से ‘मेवाड़ एंड मुगल एंपरर’ पुस्तक का हवाला दिया गया। इस पुस्तक के माध्यम से बताया गया कि वास्तव में बाबर ने ही महाराणा सांगा के पास अपना दूत भेजकर सहयोग की मांग की थी। अधिवक्ता सतीश सिंह ने बताया कि कोर्ट में डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह, भरत तिवारी और इतिहासकार डॉ. विवेक सेंगर ने अपने बयान दर्ज कराकर साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।

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