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एनेस्थीसिया की डोज देते ही शिक्षिका की मौत:अलीगढ़ में SIG अस्पताल में गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन के लिए हुईं थी भर्ती

​अलीगढ़ में धौर्रा स्थित SIG अस्पताल में रविवार को गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) के ऑपरेशन के दौरान एक निजी स्कूल की शिक्षिका की मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों पर एनेस्थीसिया की गलत डोज देने और लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया था। इस मामले में प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हॉस्पिटल को जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर संचालित कर रहे हैं और उसको डोज भी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने ही दी थी। ​11 बजे दिया एनेस्थीसिया, कुछ ही देर में मौत ​ऊपरकोट निवासी सैयद अमजद अली की पत्नी शाइस्ता इश्तियाक (45) अलीगढ़ पब्लिक स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका थीं। उनके गॉल ब्लैडर में पथरी थी। रविवार सुबह 9:30 बजे परिजन उन्हें ऑपरेशन के लिए क्वार्सी थाना क्षेत्र के SIG अस्पताल ले गए थे। परिजन मकसूद ने बताया कि शाइस्ता उनकी चचेरी बहन थीं। सुबह 11 बजे डॉक्टर ने उन्हें एनेस्थीसिया दिया। इसके तुरंत बाद हालत बिगड़ने लगी और कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया। ​परिजन से हाथापाई ​मृतका के परिजन सैयद काशिफ अली ने बताया कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण शाइस्ता की जान गई है। आरोप है कि विरोध करने पर अस्पताल स्टाफ ने परिजन के साथ हाथापाई भी की। मकसूद का कहना है कि एनेस्थीसिया लगने के बाद ही उनकी हालत खराब हुई थी। ​एनेस्थीसिया देने के बाद हृदय गति कम हुई अस्पताल संचालक प्रो. अमजद अली रिजवी का कहना है कि एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज की हृदय गति अचानक कम होने लगी थी। डॉक्टरों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने परिजनों पर भी स्टाफ के साथ मारपीट का आरोप लगाया है। ​सरकारी डॉक्टर कर रहे प्राइवेट प्रैक्टिस ​इस घटना के बाद जांच में सामने आ रहा है कि सरकारी डॉक्टर भी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। SIG हॉस्पिटल के संचालक भी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं। वहीं, एनेस्थीसिया की डोज देने वाले डॉक्टर भी मेडिकल कॉलेज में ही तैनात हैं। इस संबंध में अस्पताल संचालक प्रो. अमजद अली रिजवी का कहना है कि वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं, एएमयू से जुड़ी जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद उनका रि–अपॉइंटमेंट हो चुका है। ​शनिवार को बनाया था रिपोर्ट कार्ड ​शाइस्ता पिछले 12 वर्षों से स्कूल में कक्षा 6 से 10 तक के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ा रही थीं। शनिवार को ही उन्होंने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए थे और PTM में अभिभावकों से मुलाकात की थी। वह अक्सर कहती थीं कि छोटा सा ऑपरेशन है, कराकर जल्द स्कूल लौटेंगी। उनके पीछे दो बच्चे हैं। बेटे ने इसी साल 12वीं और बेटी ने 10वीं की परीक्षा दी है। ​पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई सीओ तृतीय सर्वम सिंह का कहना है कि परिजन की तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया और इस मामले को जांच के लिए सीएमओ ऑफिस भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी का कहना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कोई भी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। मामले की जांच की जा रही है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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