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एनकाउंटर से पहले पुलिस ने 50 घर बंद करवाए:150 पुलिस वालों ने गांव घेर रखा था, बेटा बोला- पापा को मारकर हमें थाने ले गई पुलिस

‘मैं पापा, मम्मी और मामू घर के आगे वाले हिस्से में बैठकर अलाव ताप रहे थे। तभी हथियार लेकर पुलिस आई। हमारे साथ गाली-गलौज करने लगी। मुझे, मम्मी और मामू को घर के अंदर भेज दिया और पापा को पिटने लगे। पुलिस पापा को घर के अंदर ले गई। इतने में गोलियों की आवाज आई। हमने पुलिस से पूछा तो कहा कि चलो थाने पर सवाल-जवाब करना है। फिर हमें पुलिस थाने ले गई।’ ये बातें 13 साल के यशराज ने कही है। जो अपने पापा और 50 हजार के इनामी कुख्यात दयानंद मालाकार के एनकाउंटर के वक्त मौके पर मौजूद था। एनकाउंटर के बाद भास्कर रिपोर्टर नोनपुर वार्ड नंबर-5 पहुंचे। ये वही जगह है जहां बुधवार की शाम करीब 30 गाड़ियों से 150 पुलिसकर्मी एनकाउंटर के लिए पहुंचे थे। हम गांव पहुंचे तो ग्रामीणों से पता चला पुलिस ने एनकाउंटर से पहले गांव के करीब 50 घर को बंद करवा दिया था, किसी को भी घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। शाम करीब 5 बजे से रात 9 बजे तक गांव में किसी को आने भी नहीं दिया गया। रात 9 बजे पुलिस दयानंद की लाश लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल चली गई। दयानंद को 3 गोलियां लगीं, जिसमें एक सिर में लगी है। गुरुवार को दयानंद का अंतिम संस्कार हुआ है। बेटे यशराज ने मुखाग्नि दी है। ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए गांव के लोगों ने क्या कहा ?, पुलिस क्या कह रही है ?, पुलिस ने कैसे दयानंद के घर को घेरा, कैसा था गांव का माहौल… पहले गांव में मातम और विरोध की तस्वीरें देखिए… पुलिस की गाड़ी देखते ही भड़क गए ग्रामीण लाश पहुंचने के आधा घंटा पहले भास्कर रिपोर्टर गांव पहुंचे तो काफी सन्नाटा पसरा था। जो लोग रास्ते में मिले उनसे मामले की चर्चा की तो उन्होंने काफी आक्रोश जताया। पुलिस के खिलाफ गुस्सा था। जब सदर अस्पताल से दयानंद की लाश गांव पहुंची तो हर कोई पीछे-पीछे दौड़ पड़ा। 10 मिनट के बाद तेघड़ा थाने से पुलिस की 2 गाड़ियां पहुंची तो लोग पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, लाल झंडा जिंदाबाद, दयानंद मालाकार अमर रहे के नारे लगाने लगे। आक्रोश बढ़ता देख भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचा। दूसरी तरफ परिजन दयानंद की लाश से लिपटकर रो रहे थे। पुलिस दयानंद की पत्नी ममता, बेटे यशराज और उसके मामा को उठा ले गई थी। लोग डटे थे कि जब तक यशराज नहीं आएगा तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। जिसके बाद पुलिस यशराज को लेकर आई, पर उसकी मां और मामा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की कार्रवाई पर ग्रामीण और परिजन ने क्या कहा… मैदान में 200 बच्चे खेल रहे थे, सभी को पुलिस ने भगा दिया दयानंद के बड़े भाई सचिंद्र मालाकार ने बताया, ‘पुलिस आई तो फील्ड में करीब 200 बच्चे खेल रहे थे। सबको भगा दिया, फिर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग करते हुए दयानंद के घर में पुलिस घुस गई।’ ‘दयानंद अपनी पत्नी, साला और बेटा के साथ आंगन में अलाव ताप रहा था। पुलिस ने उसे मार दिया। हम लोगों का घर वहां से 1 किलोमीटर दूर है। जानकारी मिली तो हमलोग दयानंद के घर के पास जा रहे थे, लेकिन पुलिस जाने नहीं दे रही थी। फिर रात में चौकीदार ने सूचना दी कि पोस्टमॉर्टम हो गया है, जाइए लाश ले आइए। तब हम लोग सुबह में सदर अस्पताल पहुंचे और लाश घर ले गए।’ करीब 30 राउंड गोलियां चलने की आवाज आई भाई सचिंद्र कहते हैं कि बुधवार शाम लगभग 4:20 बजे 3 बाइक से सादी वर्दी में पुलिसकर्मी खेत के रास्ते से दयानंद मालाकार के घर से 200 मीटर की दूरी पर पहुंचे। वहीं बाइक लगाकर दयानंद के घर की ओर दौड़े। पुलिस घर के सामने से नहीं जाकर साइड से बांस के अस्थाई गेट को तोड़कर घर में घुस गई। दयानंद अपनी पत्नी, बड़े बेटे और साला के साथ अलाव ताप रहा था। दयानंद नया घर बनवा रहा था और उसका साला फर्नीचर मिस्त्री है, आंगन में फर्नीचर का काम चल रहा था। पुलिस ने घेर लिया। कुछ देर के बाद ही चारों ओर से बड़ी संख्या में पुलिस आ गई और मोहल्ले से गांव तक में घेराबंदी कर दी। सभी लोगों को अपने-अपने घर में पैक कर दिया गया, किसी के भी निकलने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद ताबड़तोड़ गोली चलने लगी। उसके आंगन में लोग गए तो कुछ नहीं था। निर्माणाधीन घर के बरामदे पर एक जगह काफी खून जमा था। बेटों को अधिकारी बनाना चाहता था मेरा भाई दयानंद की बहन अनिता देवी ने कहा, ‘दयानंद मालाकार अपने दोनों बेटों को अधिकारी बनाना चाहता था। बड़ा बेटा यशराज और छोटे का नाम डीएम कुमार है। दोनों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। ठंड की जब छुट्टी हुई थी।’ ‘बड़ा बेटा यशराज पिता के साथ आंगन में था, जबकि छोटा डीएम कुमार बाहर से खेल कर आ रहा था। उसने भारी संख्या में पुलिस वालों को देखा तो डरकर वहां से भागा और गांव में ही घर से करीब 1 किलोमीटर दूर नानी के पास चला गया।’ पुलिस को देख घर जाने की हिम्मत नहीं हुई दयानंद का छोटे बेटे डीएम (8) ने बताया, ‘हम जब घर आ रहे थे तो मैंने देखा कि बहुत सारी पुलिस थी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। मैं काफी डर गया था। मुझे घर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। इसलिए मैं नानी के पास भागकर चला गया, फिर जोर से गोली चलने की आवाज आई।’ पुलिस ने एनकाउंटर नहीं किया, दयानंद को मरवाया गया है स्थानीय नंदलाल पंडित ने बताया, ‘हमारे पूर्वज जमींदार की जमीन जोत रहे थे। जमींदार ने जमीन लेनी शुरू कर दी तो 1985 में ग्रामीणों ने बंटवारा का केस दायर किया, अभी तक कोई रिजल्ट नहीं आया। पूरे मोहल्ले के लोगों को रहने के लिए जमीन नहीं है। हम लोगों ने जमींदार की जमीन पर घर बना कर रह रहे हैं। जमींदार ने पुलिस के सहयोग से दयानंद को मरवाया है। संविधान स्वतंत्रता, आजादी और समानता का अधिकार देता है। कोई परिवार हजारों बीघा जमीन रखेगा और कोई भूमिहीन रहेगा, ऐसा नहीं होगा। हम लोगों को 5 डिसमिल जमीन भी नहीं है। दयानंद हम लोगों का रहनुमा था, पूरे समाज को आगे बढ़ाने में सहयोग करता था। हम सब मिलकर बड़े लोगों के साथ लड़ाई लड़ रहे थे। पुलिस गलत काम करवाती है। बुधवार की शाम दयानंद अपने घर पर था, तभी पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया। सभी लोगों को घर के अंदर भेज दिया और दयानंद के घर के अंदर जाकर उसे मार दिया गया। करीब 9:00 रात में पुलिस यहां से लाश ले गई। यहां कोई एनकाउंटर नहीं हुआ है, अगर एनकाउंटर हुआ है तो पुलिस उसका सबूत दे। अब जानिए पुलिस का क्या कहना है… नक्सलियों ने फायरिंग की तो पुलिस को भी गोलियां चलानी पड़ी एसपी मनीष का कहना है कि बुधवार को एसटीएफ के SOG-3 को सूचना मिली कि 50 हजार रुपए का इनामी कुख्यात नक्सली और भाकपा माओवादी का उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी सचिव दयानंद मालाकार उर्फ छोटू उर्फ इंद्र भारती उर्फ कुलबीर उर्फ आकाश उर्फ सनेश अपने गिरोह के साथ गांव नोनपुर आया हुआ है। बड़ी नक्सली घटना को अंजाम देने की फिराक में है। सूचना मिलते ही तुरंत स्ट्राइकिंग टीम का गठन किया गया। जिसमें एसटीएफ एआरजी की टीम, एसटीएफ की एसओजी टीम, डीआईयू टीम, बेगूसराय पुलिस का चीता बल, अभियान दल और तेघड़ा थाना की पुलिस को शामिल किया गया। पुलिस की टीम नोनपुर पहुंचकर दयानंद मालाकार के घर की घेराबंदी कर रही थी। इसी दौरान दयानंद और उसके सहयोगी पुलिस पर अंधाधुंध गोली चलाने लगे। उसकी पत्नी ममता देवी और खोदाबंदपुर थाना क्षेत्र बारा निवासी रंजीत मालाकार छिपे हुए थे, जिसे पकड़ा गया‌। मौके पर FSL की टीम ने भी साक्ष्य जमा किए हैं। जिसके बाद मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। फरार नक्सलियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। मौके पर से एक रेगुलर इंसास राइफल, एक देसी कार्बाइन, एक पिस्टल, 2 मैगजीन, 9 एमएम की 9 गोली, 5.56 एमएम की 9 गोली, 7.65 एमएम की 7 गोली और नक्सली लेवी पर्चा बरामद किया गया है।


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