समाजवादी पार्टी के नेता मुकेश यादव के खिलाफ आबकारी ई-लॉटरी में फर्जी शपथ पत्र देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आपराधिक मुकदमे छिपाकर उन्होंने शराब की दुकान हासिल की। सपा के नेता मुकेशचंद्र उर्फ मुक्का यादव के खिलाफ आबकारी ई-लॉटरी में फर्जी शपथ पत्र देकर शराब की दुकान हासिल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक दिन बाद की गई। जबकि आरोपी कथित तौर पर एक साल तक दुकान का संचालन करता रहा। मोहल्ला काजी निवासी मुकेश यादव को सपा मुखिया अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। उन्होंने 2025-26 की आबकारी ई-लॉटरी में ऑनलाइन आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के दौरान दिए गए शपथ पत्र में उन्होंने अपने और परिवार के खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले से इनकार किया, जबकि उनके खिलाफ पहले से कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अलीगंज क्षेत्र में शराब की दुकान आवंटित की गई। जिसका संचालन 1 अप्रैल 2025 से शुरू हो गया। हैरानी की बात यह रही कि आबकारी विभाग को लगभग एक साल तक इस मामले की जानकारी नहीं हुई। बाद में शिकायतें मिलने पर जब जांच की गई, तो पता चला कि मुकेश यादव के खिलाफ एटा और मैनपुरी जिलों में कई आपराधिक मामले पहले से दर्ज थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष समाप्त होने के ठीक एक दिन बाद क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक ने कोतवाली नगर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने आबकारी विभाग की ई-लॉटरी प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू
जांच में सामने आया कि आवेदन के समय शपथ पत्र में धोखाधड़ी, जालसाजी सहित अन्य संगीन मामलों को छिपाया गया था। जो नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर आबकारी विभाग ने जांच रिपोर्ट तैयार कर संबंधित थाने में तहरीर दी। जिसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह भी सवाल उठ रहा है कि ई-लॉटरी प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। अगर सत्यापन हुआ था, तो आरोपी को दुकान कैसे आवंटित की गई। दुकान के नवीनीकरण के लिए नहीं किया आवेदन बताया जा रहा है कि नए वित्तीय वर्ष में आरोपी ने दुकान के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया। उधर, आबकारी निरीक्षक विजय कुमार सिंह ने इस मामले में कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं, आबकारी अधिकारी अनूप कुमार ने बताया कि दिसंबर माह में शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद जांच कराई गई और तथ्य सामने आने पर विधिक राय लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है।

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