औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के चिल्हकी गांव में 90 साल के जुड़वां बुजुर्ग भाइयों ने एक साथ इस दुनिया को अलविदा कह दिया। चिल्हकी गांव निवासी सुखलाल प्रजापति और मथुरा प्रजापति जुड़वां भाई थे। दोनों ने एक साथ इस दुनिया में जन्म लिया और नियति ने ऐसा संयोग रचा कि दोनों का जीवन भी लगभग एक साथ समाप्त हुआ। परिजनों के अनुसार सुखलाल प्रजापति लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और बिस्तर पर ही अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनके जुड़वां भाई मथुरा प्रजापति उम्र के असर के बावजूद चलने-फिरने में सक्षम थे और हर पल अपने भाई की देखभाल में लगे रहते थे। आधे घंटे के अंदर तोड़ा दम शुक्रवार की दोपहर लंबे समय से बीमार चल रहे सुखलाल प्रजापति ने अंतिम सांस ली। परिजन उनके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। लेकिन अपने भाई के निधन की सूचना मथुरा प्रजापति के लिए असहनीय साबित हुई। भाई के वियोग में वे खुद को संभाल नहीं सके और महज आधे घंटे के भीतर उन्होंने भी दम तोड़ दिया। एक साथ जन्म लेने वाले दोनों भाइयों का एक साथ इस दुनिया से चले जाना पूरे गांव के लिए भावुक कर देने वाला दृश्य बन गया। सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार परिजनों ने दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया। जब दोनों अर्थियां साथ उठीं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच अटूट प्रेम और आत्मीयता थी। वे हमेशा एक-दूसरे का सहारा बने रहे। रिश्तों की बेरुखी के इस दौर में सुखलाल और मथुरा प्रजापति की यह कहानी एक मिसाल बन गई है, जो यह याद दिलाती है कि सच्चे रिश्ते आज भी जिंदा हैं।
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