एआई से आएगी चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति:नई तकनीक से मरीजों को राहत देने में अहम रोल अदा करेंगे उद्यमी और युवा डॉक्टर
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एआई से आएगी चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति:नई तकनीक से मरीजों को राहत देने में अहम रोल अदा करेंगे उद्यमी और युवा डॉक्टर
चिकित्सा क्षेत्र में उद्यमी और युवा चिकित्सा कर्मी मिलकर एआई जैसी आधुनिक तकनीकों से क्रांति ला सकते हैं। केवल डॉक्टर ही नहीं, टेक्निशियन भी इस फील्ड में अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं। एरा यूनिवर्सिटी में शनिवार को आयोजित ‘इनोवेशन एंड स्टार्टअप मीट-2026’ में विशेषज्ञों ने यही संदेश दिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस ‘वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए डिजिटल समाधान’ रहा। उद्यमी, युवा चिकित्सक और तकनीकी विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के उभरते रुझानों पर जोरदार चर्चा की। कुलपति बोले, स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार जरूरी एरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक आधारित चिकित्सीय समाधान विकसित करने की जरूरत है। ईसीएसटीआरए (एरा सेंटर फॉर स्टार्टअप, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं त्वरण) शैक्षणिक जगत और उद्योग के बीच मजबूत सेतु का काम कर रहा है। प्रो. महदी ने बताया कि आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शुरुआती दौर में हैं और आने वाला समय एआई का ही होगा। उन्होंने चिकित्सकों को सलाह दी कि एआई को सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाएं। इसमें और रिसर्च कर ऐसे स्टार्टअप शुरू करें जिनसे मरीजों को सीधा फायदा हो। स्टार्टअप से भी मरीजों को दिया जा सकता है सीधा लाभ ईसीएसटीआरए के सह-संस्थापक एवं एरा यूनिवर्सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉ अली खान ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में नए स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं। युवा ऐसी तकनीक पर काम करें जिसका सीधा लाभ समाज को मिले। एरा विश्वविद्यालय इस दिशा में पूरी मदद करेगा। जॉ अली खान ने चेतावनी भी दी कि किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर गौर करना जरूरी है, क्योंकि मेडिकल फील्ड में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती। डाटा और रिसर्च का स्टार्टअप में अहम रोल डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महीप सिंह ने स्टार्टअप शुरू करने से पहले डेटा और शोध की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि कोई भी नया स्टार्टअप शुरू कर सकता है, लेकिन उसे सफल बनाने के लिए गहन शोध और ठोस डेटा की जरूरत पड़ती है। कार्यक्रम में ‘स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका’ पर एक परिचर्चा भी हुई। इसमें जॉ अली खान, डॉ. राहुल सिंह अमृतराज, प्रो. थिपेंद्र पी. सिंह और आजम अली खान ने अपने विचार रखे। संचालन श्यामनाथ हरिनाथ ने किया। इन स्टार्टअप्स को मिला सम्मान स्टार्टअप प्रस्तुति सत्र में पांच स्टार्टअप्स ने भाग लिया- डायनो प्लस+, एमकेयर मेडिकल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पॉलीफार्म गार्ड, कियो एआई और डिफी केयर। प्रतियोगिता के नतीजे इस प्रकार रहे: प्रथम स्थान: एमकेयर मेडिकल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (25,000 रुपये) द्वितीय स्थान: पॉलीफार्म गार्ड (15,000 रुपये) तृतीय स्थान: डायग्नो प्लस+ (10,000 रुपये) सीमेंस हेल्थीनियर्स के वरिष्ठ प्रबंधक मोहम्मद अली ने ईसीएसटीआरए की इनक्यूबेशन प्रणाली और चल रही पहलों की जानकारी दी तथा चयनित स्टार्टअप्स को स्वीकृति पत्र सौंपे। एरा यूनिवर्सिटी के इस कार्यक्रम ने साफ संकेत दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल इनोवेशन और स्टार्टअप्स का भविष्य उज्ज्वल है। उद्यमी, चिकित्सक और टेक्निशियन अगर साथ मिलकर काम करें तो मरीजों को बेहतर और सस्ता इलाज मुहैया कराया जा सकता है।
Source: Dainik Bhaskar via DNI News
