बुलंदशहर में 10 साल के बच्चे के गले के आरपार हुए सरिये को ऑपरेशन के बाद निकाल दिया गया है। करीब साढ़े 3 घंटे तक ऑपरेशन चला। इसके बाद अब बच्चे की हालत बिल्कुल ठीक है। फिलहाल बच्चे को आइसीयू में रखा गया है। आज मासूम को ऑब्जर्वेशन के बाद सामान्य वार्ड में शिफ्ट करने किया जाएगा। मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव मिर्जापुर नयागांव का है। बता दें कि शनिवार दोपहर को ऋषभ (10) पुत्र राजकुमार सुबह गांव के बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह निर्माणाधीन प्लॉट में बॉल लेने के लिए चला गया था। खेलते हुए 10 साल का ऋषभ एक पिलर के ऊपर गिर गया। पिलर में लगी लोहे की सरिया उसके सीने से घुसकर गले के आर-पार हो गई। ऋषभ एक निर्माणाधीन मकान में अपनी गेंद उठाने गया था। उसी समय पैर फिसलने से वह पिलर पर गिर गया। जब चोट लगी, तब सरिया बच्चे के सीने और गले से आर-पार हो गया था। लेकिन, बच्चे के न तो ज्यादा खून निकला और न ही तत्काल कोई दिक्कत हुई। गैस कटर से सरिया काटकर बच्चे को उसी हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। वहां बच्चे का सीटी स्कैन समेत कई जांचें कराई गई। करीब साढ़े 3 घंटे तक ऑपरेशन चला। डॉक्टरों ने सरिया निकाल दिया। बच्चे को सर्जिकल वार्ड से इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टर ने बताया कि बच्चा खतरे से बाहर है। इसी दौरान उसके पैर फिसलने के कारण वह पिलर पर जा गिरा। पिलर में निकल रहा सरिया उसके गले के आरपार हो गया। ग्रामीणों ने सरिया काटा और बच्चे को लेकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां ऑपरेशन के बाद बच्चे के शरीर में से सरिया निकाल दिया गया। ऋषभ की हिम्मत से हैरत में डॉक्टर बिजली फिटिंग करने वाले राजकुमार के तीन बच्चे है। ऋषभ मंझला है। शरीर में घुसे सरिया के साथ ऋषभ को अस्पताल लाया गया। वह एक बार भी रोया नहीं और न ही बेहोश हुआ। एंबुलेंस में बैठा भी वह लोगों को देखता रहा। अस्पताल में खड़े लोग किशोर की हिम्मत और हौसले को देखकर हैरत करते रहे। डॉ हितेश कौशिक ने बताया कि सरिया शरीर में घुस गया। सरिया से दिल और फेफड़ा दोनों किसी तरह बच गए। यदि सरिया फेफड़ा या दिल को क्षतिग्रस्त करता तो मुश्किल हो जाती।

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