आयकर विभाग की इंटेलीजेंस एवं क्रिमिनल इंवेस्टीगेशंस शाखा ने आगरा, एत्मादपुर स्थित उप निबंधक कार्यालय में सर्वे किया। यहां बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायत मिली थी। लगभग 5 घंटे तक चली जांच में 750 करोड़ रुपये की हेराफेरी की संभावना जताई गई है। आयकर की टीम को कई रिकॉर्ड नहीं मिले हैं।
दोपहर बाद जैसे ही आयकर विभाग की टीम ने उप निबंधक कार्यालय में प्रवेश किया, वहां उपस्थित स्टाफ घबरा गया। अफरातफरी की स्थिति हो गई। रजिस्ट्री कराने आए लोग दाएं बाएं होने का प्रयास करने लगे। उच्चाधिकारियों के चेहरे की रंगत भी उड़ने लगी। आयकर की टीम ने 5 घंटे के दौरान कई अहम जानकारियां जुटाईं। उप निबंधक कार्यालय के कर्मचारियों से सवाल-जवाब भी किए लेकिन कइयों के जवाब मिले ही नहीं। अधिकारी इस बात पर नाराज थे कि उप निबंधक कार्यालय ने जरूरी एसएफटी (स्पेशल फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) की रिपोर्टिंग विभाग को नहीं की। विभागीय टीम ने आशंका जताई कि रजिस्ट्री में आयकर के नियमों का पालन ही नहीं किया गया। 30 लाख के बैनामों की सूचना नहीं दी
संपत्ति की खरीद-बिक्री के 30 लाख से अधिक के बैनामों की सूचना आयकर विभाग को देनी होती है। मगर, आयकर को इसकी सूचना ही नहीं थी। साथ ही बैनामों में 20 हजार रुपये से अधिक का नकद लेन-देन नहीं किया जा सकता है। लेकिन उप निबंधक के कार्यालय में इसका पालन नहीं हुआ। नहीं पूरी की गईं औपचारिकताएं उप निबंधक के यहां जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के अनुसार टीडीएस की देयता रहती है। पैन कार्ड का नंबर दर्ज कराना अनिवार्य रहता है। लेकिन बीती अवधि के बैनामों में ऐसी औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया गया। आयकर की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई इस लापरवाही को लेकर संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। संबंधित पक्षों से पूरी जानकारी ली जा रही है।

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