उन्नाव में जिला होम्योपैथी चिकित्सालय परिसर से लाखों रुपये की होम्योपैथी दवाएं कूड़े के ढेर में मिली हैं। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और दवा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल परिसर के एक हिस्से में बड़ी संख्या में दवाइयों के डिब्बे खुले में फेंके हुए पाए गए। आरोप है कि ये दवाएं मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न केंद्रों पर भेजी जानी थीं, लेकिन इन्हें “एक्सपायरी” या “खराब” बताकर छंटाई के नाम पर बाहर फेंक दिया गया। इस मामले से वित्तीय अनियमितता और लापरवाही की आशंका बढ़ गई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी अस्पतालों में अक्सर दवाइयों की कमी की शिकायतें आती रहती हैं और मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। ऐसे में लाखों रुपये की दवाओं का इस तरह कूड़े में मिलना कई सवाल खड़े करता है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें अक्सर पर्याप्त दवाएं नहीं मिलतीं, जिससे मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ता है।
इस मामले पर जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि बारिश में भीगने और एक्सपायरी की आशंका के कारण दवाओं को छंटाई के लिए अस्थायी रूप से बाहर रखा गया था। डॉ. सिंह के अनुसार, इन दवाओं को बाद में सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाना था। उन्होंने यह भी बताया कि ये दवाएं केरल से प्राप्त हुई थीं और वर्ष 2024 की एक्सपायरी से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि, विभाग के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कई सवाल अनुत्तरित हैं। यदि दवाएं खराब थीं, तो उनका नियमानुसार निस्तारण क्यों नहीं किया गया और उन्हें खुले में रखने की क्या आवश्यकता थी? सूत्रों के मुताबिक, कुर्सट और लालऊखेड़ा सहित अन्य केंद्रों पर इसी खेप की दवाएं मरीजों को दिए जाने की बात भी सामने आई है, जो स्थिति को और जटिल बनाती है।

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