उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लखनऊ में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘नीति से इन्क्यूबेशन तक, और फिर व्यवहार तक’ विषय पर आधारित यह कार्यक्रम महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और ग्रीन पेटल्स ट्रस्ट, मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सीतापुर रोड स्थित सभागार में संपन्न हुआ। इसमें 200 से अधिक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, स्कूल प्राचार्यों और छात्रों ने भाग लिया। राष्ट्रीय एकीकरण विभाग के सचिव डॉ. हीरा लाल ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तेजी से बदलते दौर में नौकरियों के अवसर घट रहे हैं, ऐसे में युवाओं के लिए उद्यमिता अपनाना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से चुनौतियों को अवसर में बदलने और अपने कौशल को लगातार बेहतर बनाने की अपील की। ऐसे आयोजन छात्रों को नई दिशा देने में सहायक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भानु प्रताप सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को नई दिशा प्रदान करने में सहायक होते हैं। मुख्य वक्ता डॉ. यशपाल सिंह ने स्टार्टअप्स को पर्यावरणीय नियमों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया। वित्त मंत्रालय से जुड़े डॉ. हरीश यादव ने स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी। एमएसएमई मंत्रालय के प्रतिनिधि डॉ. ओ.पी. पटेल ने सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय से सतीश कुमार ने नवाचारों और विचारों को पेटेंट कराने की आवश्यकता बताई। उद्यमिता एक मजबूत आधार सम्मेलन के संयोजक एस.पी वर्मा ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, उद्योग और सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, जिससे उद्यमिता को एक मजबूत आधार मिल सके। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे मंच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जो स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।सम्मेलन में यह उम्मीद व्यक्त की गई कि छात्र, युवा उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मिलकर देश के उद्यमिता इकोसिस्टम को मजबूत करेंगे और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

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