मुजफ्फरनगर में मुश्किल हालातों के आगे झुकने से इनकार करते हुए मेघाखेड़ी गांव की रहने वाली सोनिया तोमर ने एक बार फिर ई-रिक्शा का हैंडल थाम लिया है। दो महीने तक सिस्टम के चक्कर काटने और रोज़गार छिन जाने के बाद अब उन्होंने नई शुरुआत की है, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी कई सवाल छोड़ जाती है। दरअसल, सोनिया तोमर अपने पति धर्मेंद्र की मौत के बाद से ही परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही हैं। बच्चों का पेट पालने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया और किसी तरह घर का गुजारा चलाने लगीं। लेकिन इसी दौरान एक हादसे ने उनकी जिंदगी को फिर से झकझोर दिया। जब वह ई-रिक्शा लेकर घर लौट रही थीं, तभी एक प्रतिष्ठित कॉलेज की स्कूल बस ने पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में सोनिया घायल हो गईं और उनका ई-रिक्शा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आरोप है कि हादसे में गलती न होने के बावजूद भी कार्रवाई का सामना उन्हें ही करना पड़ा। पीड़िता के अनुसार, पुलिस ने उनका ई-रिक्शा भी सीज कर दिया, जिससे उनका एकमात्र रोज़गार भी छिन गया। इसके बाद सोनिया करीब दो महीने तक अधिकारियों के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। आर्थिक तंगी लगातार बढ़ती गई और परिवार के सामने फिर से संकट खड़ा हो गया। हालांकि इन तमाम मुश्किलों के बीच सोनिया ने हार नहीं मानी। अपनी एक सहेली की मदद से उन्होंने नया ई-रिक्शा खरीदा और एक बार फिर सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों की जिम्मेदारी उठानी शुरू कर दी। सोनिया की यह कहानी जहां उनके हौसले और जज्बे को दर्शाती है, वहीं यह भी दिखाती है कि मुश्किल वक्त में व्यवस्था से अपेक्षित सहारा न मिलने पर आम व्यक्ति किस तरह खुद ही अपनी राह बनाता है।

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