मिडिल ईस्ट से इस वक्त जो खबर सामने आ रही है वो बेहद गंभीर है। बेहद संवेदनशील है और यह सिर्फ एक हमला नहीं बल्कि एक ऐसा संकेत है जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की दिशा बदल सकता है। इटर्स की खबर के अनुसार ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर सबसे बड़ा और सबसे घातक हमला बोला। यह वही एयरबेस है जहां अमेरिका के कई महत्वपूर्ण एयरक्राफ्ट और सैन्य संसाधन तैनात रहते हैं। इस हमले की गंभीरता आप इसी बात से समझ सकते हैं। कम से कम तीन KC135 स्ट्रेटो टैंकर प्रभावित हुए हैं। एक E3 सेंट्री AOK विमान भी नुकसान में बताया जा रहा है और 10 से 12 अमेरिकी सैनिक घायल बताए जा रहे हैं। जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जाती है। दरअसल, जानकारी के अनुसार यह कोई साधारण हमला नहीं है बल्कि एक पूरी तरह से योजनाबद्ध और समन्वित हमला था। ईरान ने इसमें बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का एक साथ इस्तेमाल किया।
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सऊदी और अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में मार गिराया। लेकिन इसके बावजूद कुछ मिसाइलें और ड्रोन डिफेंस सिस्टम को पार कर गए और सीधे एयरबेस के संवेदनशील हिस्सों को निशाना बना लिया। यह साफ दिखाता है कि हमला बेहद सटीक और जानकारी के आधार पर किया गया था। अब सेटेलाइट से क्या पता चलता है यह जान लीजिए। तो सेटेलाइट इमेजरी में यह दिखाया गया है कि एयरक्राफ्ट पार्किंग एरिया में नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर आग और धुआं दिखाई दिया है। थर्मल सिग्नल से हालिया विस्फोट की पुष्टि होती है और इससे यह संकेत मिलता है कि हमला प्रभावी रहा है और सिर्फ दावे नहीं किए जा रहे हैं। अब यह समझते हैं कि जिन संसाधनों को नुकसान हुआ है, वह इतने अहम क्यों हैं? KC135 टैंकर। यह विमान हवा में ही दूसरे फाइटर जेट्स को ईंधन देता है। इसका मतलब यह है कि इसके बिना लंबे समय तक एयर ऑपरेशन चलाना मुश्किल हो जाता है।
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दूसरा है E3X। यह एक तरह से आसमान में उड़ता हुआ कंट्रोल सेंटर होता है। यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है और पूरे एयर ऑपरेशन को कंट्रोल करता है। अगर यह दोनों सिस्टम प्रभावित हो चुके हैं तो अमेरिका की एयर ऑपरेशन क्षमता पर सीधा असर पड़ा है। अब इस हमले को सिर्फ सैन्य कारवाही के रूप में देखना गलत होगा। इसके पीछे एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश छुपा है। संदेश नंबर एक कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बचेगी।संदेश नंबर तीन ताकत अभी भी बरकरार है। जी हां, अमेरिका के लिए बहुत बड़ा यह झटका है। हालांकि अमेरिका के पास बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधन है। लेकिन लगातार नुकसान से उसकी ऑपरेशन क्षमता प्रभावित होती जा रही है। उसे अपने संसाधनों को अलग-अलग जगहों पर तैनात करना पड़ रहा है। इसका मतलब यह है कि खतरा वास्तविक है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह हमला सऊदी अरब और अन्य गल्फ देशों के लिए भी चिंता का विषय है।

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