IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही सुर्खियों में है। अपने इस्तीफे पर रिंकू सिंह कहते हैं- राष्ट्रपति को लिखा मेरा लेटर कोई रेजिगनेशन नहीं है, ये टेक्नीकल रेजिगनेशन है, मतलब इसको पुरानी सेवा में जाने का एक ऑफर समझिए। वह कहते हैं- अगर मुझसे काम नहीं करवा पा रहे हैं, तो मुझे वापस मूल सेवा (समाज कल्याण विभाग) में भेज दो। कई अफसर त्यागपत्र देते हैं कि उन्हें सरकारी सिस्टम समझ नहीं आ रहा है। मैं आपको बता दूं कि मुझे सरकारी सिस्टम पसंद है। मैं इस सिस्टम को छोड़ना नहीं चाहता हूं। कुछ कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा सकता है। IAS रिंकू सिंह ने 26 मार्च को राष्ट्रपति को एक लेटर लिखा था। इसके बाद उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हुई। इसको लेकर दैनिक भास्कर ने रिंकू सिंह से डिटेल बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट… सवाल. क्या पोस्टिंग के लिए आपको प्रताड़ित किया गया? रिंकू. मुझे प्रताड़ित नहीं किया गया। मैं पर्सनली बहुत खुश हूं, घूमने फिरने का समय मिल रहा है। मैं जॉब में व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं आया हूं, मैं लोगों की सेवा के लिए जॉब में आया हूं। जैसा और लोगों के साथ होता है, वैसा नहीं है। यह नैतिक मामला है। मेरे आदर्श और सिद्धांत आड़े आ रहे हैं। सवाल. आपने कभी मुख्य सचिव या राजस्व परिषद के अध्यक्ष से संपर्क किया? रिंकू. मैंने उन्हें पहले भी नो वर्क-नो पे वाला लेटर लिखा था। इसके बाद उनसे मुलाकात का क्या मतलब है। सवाल. आपने कभी पोस्टिंग के लिए मुख्य सचिव से संपर्क किया? रिंकू. जिन्हें पोस्टिंग की चाहत होती है, वह अधिकारी से मिलते हैं। मुझे पोस्टिंग की चाहत नहीं है, कोई भी काम दें, मुझे तो सिर्फ काम करना है। उनकी ड्यूटी है कि देखें कि मेरी पोस्टिंग कहां करनी है। मैं उन्हें क्यों बताने जाऊं कि पोस्टिंग कहां करें? सवाल. फिर आपने त्यागपत्र क्यों दिया? रिंकू. मीडिया में यह गलत आ गया है कि मैंने पोस्टिंग नहीं मिलने के कारण त्याग पत्र दिया है। मुझे पोस्टिंग की चिंता नहीं हैं, जहां रखेंगे वहीं काम करेंगे। यह मैं डिसाइड नहीं करुंगा कि कहां काम करना है, जिसकी जो ड्यूटी है, वह करेगा। मैं उनसे बताने क्यों जाऊं कि आपकी ड्यूटी यह है कि मुझे पोस्ट करें। सवाल. क्या आप अनुसूचित जाति से आते हैं, इस कारण ऐसा हुआ है? रिंकू. मुझे नहीं पता है। मैंने इस बारे में तो कभी सोचा नहीं है, इसलिए मैं उत्तर नहीं दे सकता हूं। मैं तो यह कहता हूं कि मेरी जगह कोई और अधिकारी होता तो उसे भी यह भुगतना पड़ेगा। मैं आपको बता दूं कि एससी जाति से अलग एक जाति और भी होती है, ईमानदारी वाली जाति। ईमानदारी भी दो तरह की होती है- एक खाली ईमानदार होते हैं कि हम पैसा नहीं लेंगे। दूसरे ईमानदारी के साथ काम करने वाले होते हैं। मैं ईमानदारी के साथ काम करना वाला हूं। सवाल. आपने लिखा है कि भ्रष्टाचार का समानांतर तंत्र चल रहा है, इस बात का क्या आधार है? रिंकू. हां…बिल्कुल सही कहा है, आप देखते होंगे कि आप कहीं जाते हैं, तो वहां सड़क नहीं होती है, लेकिन कागजों में सड़क बन चुकी होती है। यह भ्रष्टाचार का तंत्र ही है, इससे राजनीतिक लोग भी परेशान है। सवाल. भ्रष्टाचार के इस तंत्र को कौन चला रहा है? रिंकू. ब्यूरोक्रेसी ही इस भ्रष्टाचार का तंत्र चला रही है। ब्यूरोक्रेसी ने तंत्र बना रखा है कि बिना पैसा यह तंत्र चल ही नहीं सकता है। कागजों में काम हो जा रहा है, तो इसके क्या मतलब हैं? सवाल. आपको चार-पांच महीने से पोस्टिंग नहीं मिली है, इस पर क्या कहेंगे? रिंकू. आजादी के बाद पहला मौका होगा जब जूनियर IAS के साथ ऐसा व्यवहार हुआ होगा। मैंने कह दिया था कि अगर काम नहीं मिलेगा, तो वेतन भी नहीं लूंगा। अगर जूनियर IAS के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो उसका क्या संदेश जाएगा। मैं तो पका हुआ हूं, पहले ही पनिशमेंट, पोस्टिंग सब झेल चुका हूं। किसी नए अधिकारी के साथ ऐसा होगा, तो वह हमेशा के लिए नेगेटिव हो जाएगा। सभी अधिकारियों को करप्ट बनाने का तरीका है, मैंने इसका खुलासा किया है। भास्कर – क्या आपसे किसी शासन के अधिकारी ने संपर्क किया? रिंकू. मेरी काफी लोगों से बात हो रही है, अब शासन तो लिखित में मुझे नोटिस या चार्जशीट ही देगा।
पढ़िए, SDM से क्यों हटाए गए थे रिंकू सिंह
8 महीने पहले रिंकू सिंह राही मथुरा में जॉइंट मजिस्ट्रेट थे। वहां से ट्रांसफर होकर 24 जुलाई, 2025 को दोपहर 2 बजे पुवायां SDM का चार्ज संभाला था। इसी दौरान उनकी नजर परिसर के अंदर ही दीवार के पास टॉयलेट कर रहे वकील आज्ञाराम के मुंशी विजय (38) पर पड़ी। उन्होंने उसे टोक दिया और शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए कहा। मुंशी ने रिंकू सिंह को जवाब दिया कि शौचालय गंदे हैं। इस पर एसडीएम बिफर गए थे। कहने लगे थे कि ये गलती तहसील कर्मचारियों की है। उन्होंने मौके पर ही मुंशी से उठक-बैठक लगवा दी थी। तहसील परिसर में वकील अपनी कुछ मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तभी उनको मंशी से उठक-बैठक लगवाने की बात पता चल गई। इस पर वकील भड़क गए थे। उन्होंने एसडीएम को मौके पर बुलवा लिया था। एसडीएम ने वकीलों से कहा था कि मुंशी ने गलती की है। इस पर वकीलों ने कहा था कि गलती है, तो उठक-बैठक लगवाना सही नहीं है। क्या आप उठक-बैठक लगा सकते हैं? इस पर रिंकू सिंह ने कहा था कि इसमें कोई शर्म नहीं है। मैं उठक-बैठक लगा सकता हूं। इसके बाद उन्होंने 5 बार उठक-बैठक लगाई थी। हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने
रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंक के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था। उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे, धरना दिया था
इस हमले के बाद रिंकू को हायर सेंटर मेरठ ले जाया गया था। करीब एक महीने मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे थे। ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे थे। इसके बाद घोटाला के खुलासे के लिए रिंकू ने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था। पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था।
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