इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के एक पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में किसानों के पक्ष में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने किसानों को मिलने वाला मुआवजा बढ़ा दिया है। यह मामला 1983 की एक अपील से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले देरी से दायर याचिका और मृत पक्षकारों के वारिसों को शामिल करने की अनुमति दे दी। इसके बाद मुख्य मामले पर फैसला सुनाया गया। यह जमीन नोएडा ने 1976 में गांव मोरना, तहसील दादरी से अधिग्रहित की थी। पहले 1981 में जिला जज ने मुआवजा 6 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया था। किसानों ने इसे बढ़ाने की मांग की थी। किसानों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें इसी तरह के मामले में मुआवजा 28.12 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया गया था। हाईकोर्ट ने इस दलील को सही मानते हुए यहां भी मुआवजा बढ़ाकर 28.12 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ज्यादा सोलातियम (मुआवजे पर अतिरिक्त रकम) और ज्यादा ब्याज नहीं मिलेगा, क्योंकि यह मामला पुराने कानून के तहत आता है। किसानों को 15% सोलातियम और 6% सालाना ब्याज ही दिया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि एक खास अवधि (20 मई 1982 से 13 जुलाई 1983) का ब्याज किसानों को नहीं मिलेगा।

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