इटावा। जमीनी विवाद के एक लंबे समय से चले आ रहे मामले में इटावा की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें पूर्व प्रधान समेत एक ही परिवार के 11 लोगों को हत्या के प्रयास, मारपीट और एससी एसटी एक्ट के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 46-46 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और जुर्माना न देने पर तीन-तीन साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है। वर्ष 2016 में हुई इस घटना में कई लोग घायल हुए थे, जबकि एक व्यक्ति की आंख की रोशनी तक चली गई थी। वहीं सजा के बाद परिवार ने फैसले को गलत बताते हुए हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। जमीनी नापतोल के दौरान हुआ था विवाद यह घटना 27 मार्च 2016 की है, जब थाना वैदपुरा क्षेत्र के नगला जैतिया गांव में ग्राम समाज की जमीन की नापतोल हो रही थी। रामकिशोर को आवंटित जमीन की पैमाइश के लिए तहसीलदार और लेखपाल मौके पर पहुंचे थे और अन्य पट्टेदारों को भी बुलाया गया था। उसी दौरान पहले से मौजूद पूर्व प्रधान रामशंकर और उनके परिजन लाठी-डंडों और अवैध हथियारों के साथ वहां खड़े थे। मामूली कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया और आरोपितों ने अचानक हमला बोल दिया। फायरिंग और हथियारों से हमला, कई घायल हमलावरों ने रामकिशोर, अनिल कुमार, उनके चाचा सत्यदेव, चाची नारायणी देवी और पड़ोसी रक्षपाल सिंह पर हमला कर दिया। आरोप है कि उन्होंने तमंचों से फायरिंग की और लाठी-डंडों व कुल्हाड़ी से मारपीट की। इस हमले में पांचों लोग घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति को सिर और आंख में गंभीर चोट आई, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। घटना के बाद सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चला। मुकदमा दर्ज, पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट घटना के अगले दिन 28 मार्च 2016 को पीड़ित पक्ष की ओर से रामकिशोर के भाई अनुज कुमार ने थाना वैदपुरा में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की और हत्या के प्रयास, बलवा, मारपीट तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। विवेचना के बाद पुलिस ने रामशंकर, सुरेंद्र, उनके पुत्रों और अन्य परिजनों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट संख्या दो संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में हुई। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी 11 आरोपितों को दोषी पाया। कोर्ट ने हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं में सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 46 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन-तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। प्रशासनिक स्तर पर भी होती रही निगरानी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार निगरानी की जा रही थी। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग सेल की बैठकों में इस केस की समीक्षा की जाती रही। जिला शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि मुख्य आरोपित पूर्व प्रधान रामशंकर को पहले से ही चिन्हित माफिया के रूप में दर्ज किया गया था। प्रभावी पैरवी के चलते ही अदालत से यह सख्त फैसला सामने आया। फैसले के बाद परिवार में मचा कोहराम अदालत के फैसले के बाद दोषियों के परिवार में कोहराम मच गया। सभी 11 दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद कस्टडी में ले लिया गया और विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें केंद्रीय कारागार महोला जेल भेज दिया गया। कचहरी परिसर में परिजन रोते-बिलखते नजर आए और अपने परिजनों से मिलने पहुंचे। बहनों और बेटियों की आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। परिजनों ने फैसले को बताया गलत दोषियों के परिवार के लोगों ने अदालत के फैसले को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद था, जिसमें मारपीट हुई थी, लेकिन इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। परिवार का आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठाकर सख्त सजा दिलवाई है। हाईकोर्ट जाने की तैयारी परिजनों ने साफ कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय में उन्हें राहत मिलेगी। फिलहाल पूरे मामले में सजा के बाद गांव और आसपास के इलाके में इस फैसले की चर्चा बनी हुई है।

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