इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण मेरठ के कई युवक इजराइल और सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। वे ईद के अवसर पर अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं और विदेश में ही त्योहार मनाने को मजबूर हैं। युद्ध के बिगड़ते हालात ने उन्हें वतन वापसी से रोक दिया है, वहीं कुछ युवकों को अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी है। फंसे हुए युवकों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना दर्द साझा किया। उनका कहना है कि युद्ध ने उनसे नौकरी और आर्थिक सुरक्षा छीन ली है, और अब अपने देश लौटना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। मेरठ में उनके परिजन बेसब्री से वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरवालों का कहना है कि उनके बेटे रोजगार के लिए विदेश गए थे, लेकिन ईद पर भी घर न आ पाने की स्थिति ने उन्हें निराश किया है।
लिसाड़ी गेट की खुशहाल कॉलोनी निवासी मोहम्मद शाहनवाज पिछले दो साल से इजराइल के तेल अवीव में कंस्ट्रक्शन का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी हालात ठीक नहीं थे, लेकिन इस बार स्थिति और अधिक भयावह है। शाहनवाज के अनुसार, “रात-रात भर नींद नहीं आती। दूर कहीं मिसाइल गिरती है तो उसके धमाके की गूंज हमारे कमरों तक महसूस होती है। डर हर वक्त साथ रहता है।” शाहनवाज को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि वे ईद पर अपने घर नहीं पहुंच पा रहे। मेरठ में उनके परिवार की हालत भी ऐसी ही है। उनके माता-पिता हर पल बेटे की सकुशल वापसी की दुआ कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि बेटे के बिना कैसी ईद, वे बस फोन पर उसकी आवाज सुनकर ही खुद को संभाल रहे हैं। दूसरी ओर, लिसाड़ी गेट की विकासपुरी निवासी रिजवान खान सऊदी अरब में अपने भतीजे के साथ काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि युद्ध की आंच सऊदी अरब तक भी पहुंच चुकी है। हालात बिगड़ने के बाद उनकी कंपनी ने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जिनमें रिजवान भी शामिल हैं। रिजवान कहते हैं कि उनकी नौकरी चली गई है और ईद का त्योहार भी उन्हें विदेश में ही मनाना पड़ रहा है।

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