उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन से संबद्ध ऐक्टू के राज्यव्यापी आह्वान पर सैकड़ों आशा कर्मियों ने रायबरेली के विकास भवन में धरना दिया। बाद में उन्होंने जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और एक सभा आयोजित की। यह विरोध प्रदर्शन बकाया प्रोत्साहन राशियों के भुगतान में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ था। सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की 1090 करोड़ रुपये की बकाया प्रोत्साहन राशि फरवरी में जारी कर दी थी। इसी तरह, 2025-26 की सभी प्रोत्साहन राशियों का अवशेष और राज्य वित्त से मिलने वाली अनुतोष राशि भी सरकार ने जारी कर दी है।
गीता मिश्रा ने आरोप लगाया कि रायबरेली जनपद को भी उसके बकाया के सापेक्ष धन आवंटित किया गया है, लेकिन इसके भुगतान में भारी अनियमितता, मनमानी और लूट-खसोट जारी है। उन्होंने दावा किया कि जहां कहीं भुगतान किया भी जा रहा है, वहां 50% तक की वसूली की जा रही है। यह हेरफेर निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरी मशीनरी की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का है। जिला सचिव गीता सिंह ने कहा कि लाखों रुपये वेतन पाने वाले अधिकारियों को आशा कर्मियों के सौ-दो सौ रुपये चुराए बिना खाना हजम नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले भर में आशा कर्मियों की मेहनत का हिस्सा डकारा जा रहा है। उन्होंने जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किए गए भुगतान का आशा के नाम और मद सहित पूरा ब्यौरा नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने की मांग की थी, लेकिन किसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। आशा कर्मियों ने यह भी बताया कि दर्जनों कार्यों का भुगतान कई वर्षों से नहीं दिया गया है। इनमें आयुष्मान गोल्डन कार्ड, आभा आईडी सृजन, कुष्ठ रोग, टीबी, टीबी स्क्रीनिंग, खसरा, नसबंदी और पीएसवाई सहित लगभग 50 कार्य शामिल हैं, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। विमला देवी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वैक्सीन कूरियर का कार्य भी आशा कर्मियों से लिया जाता है, लेकिन इसका भुगतान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ठेके पर सफाई करने वाले लोगों या बेनामी खातों में स्थानांतरित कर लिया जाता है।

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