उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह शाही के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतापगढ़ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस इस्तीफे को ‘बेहद दुखद और चिंताजनक’ बताया। रामपुरखास विधानसभा क्षेत्र के लालगंज में एक कार्यक्रम के दौरान विधायक मोना ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक अधिकारी का इस्तीफा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साधारण और गरीब परिवारों से आने वाले युवा कड़ी मेहनत से यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास करते हैं, लेकिन उनके साथ ऐसी घटनाएं होना दुखद है। मोना ने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी ने वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद चयन हासिल किया, उसे किन परिस्थितियों में इस्तीफा देना पड़ा होगा। उन्होंने पिछले डेढ़ साल से सामने आ रही परिस्थितियों और व्यवहार को ‘पूरी तरह निराशाजनक’ बताया। समानता के अधिकार को भी वर्तमान व्यवस्था में कमजोर किया जा रहा कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह संविधान की मूल भावना के विपरीत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित देश कमजोर होता दिख रहा है, और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए समानता के अधिकार को भी वर्तमान व्यवस्था में कमजोर किया जा रहा है। मोना ने हरियाणा में एक दलित आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या का भी जिक्र किया और कहा कि यह ऐसी पहली घटना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ‘दलित, युवा और गरीब विरोधी मानसिकता’ के साथ काम कर रही है।उन्होंने मेहनत और मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने वाले लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार को ‘निंदनीय’ बताया और इसकी कड़ी निंदा की।

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