मिर्जापुर में चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि पर सिद्धपीठ विंध्याचल धाम में आदिशक्ति मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा-अर्चना श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। भोर से ही धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि पर माँ महागौरी की उपासना का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि माँ अपने भक्तों के समस्त पापों का नाश कर उन्हें सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माँ ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका वर्ण अत्यंत गौर और तेजस्वी हो गया और इसी कारण वे महागौरी के नाम से विख्यात हुईं। अष्टमी के दिन धाम में श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन-पूजन करते नजर आए। इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन करते हैं और उन्हें भोजन एवं उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। देशभर से आए भक्तों का कहना है कि माँ अपने दरबार में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को खाली हाथ नहीं लौटातीं और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। माँ महागौरी के दर्शन-पूजन से भक्तों को आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है। धार्मिक विश्वास है कि नियमपूर्वक और श्रद्धा के साथ की गई पूजा से माँ अपने भक्तों को अभय, सुख, समृद्धि और सिद्धि प्रदान करती हैं। नवरात्र का अष्टमी दिवस भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी और कल्याणकारी माना जाता है।

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