अलीगढ़ में ईद की नमाज शांति पूर्ण तरीके से संपन्न हुई। लेकिन करीब 3000 लोगों के सड़क पर नमाज पढ़ने का मामला चर्चाओं का विषय बन गया। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने नियमों का हवाला देते हुए ईदगाह परिसर के अंदर ही नमाज की बात कही। वहीं, मुफ्ती ने कहा कि यह अल्लाह की मर्जी थी और 10 मिनट में क्या फर्क पड़ता है। 10 मिनट की नमाज से क्या नुकसान? मुफ्ती मोहम्मद अकबर कासमी ने कहा कि सड़क पर नमाज अदा की गई है। उन्होंने इसे अल्लाह की मर्जी बताते हुए कहा कि इंसान अपनी क्षमता भर कोशिश कर सकता है, लेकिन जो खुदा को मंजूर होता है वही होता है। भेदभाव का लगाया आरोप मुफ्ती ने कहा कि 10-15 मिनट की नमाज से आज तक कभी कोई भगदड़ या अप्रिय घटना नहीं हुई। इसे मुद्दा बनाना सिर्फ एक समुदाय को मानसिक रूप से टारगेट करना है। उन्होंने कहा कि होली, दिवाली और कांवड़ यात्रा को शासन-प्रशासन द्वारा प्रमोट किया जाता है, लेकिन नमाज के वक्त पाबंदियां लगाई जाती हैं। देश में सबके साथ समान व्यवहार होना चाहिए। DM बोले- कहीं नहीं हुई सड़क पर नमाज ईदगाह पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे जिलाधिकारी संजीव रंजन ने कहा कि नमाज पूरी तरह अनुशासन के साथ ईदगाह के भीतर ही संपन्न हुई है। भीड़ को मैनेज करने के लिए इस बार ईदगाह में दो पालियों में नमाज अदा कराई गई। सुरक्षा का कड़ा पहरा संवेदनशीलता को देखते हुए भारी पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात रहे। ड्रोन कैमरों से भी भीड़ की निगरानी की गई। डीएम और एसएसपी सुबह से ही सड़कों पर थे। कहीं भी यातायात बाधित नहीं हुआ और नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अलीगढ़ की 100 से अधिक मस्जिदों में हुई नमाज अलीगढ़ में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 150 से अधिक प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में ईद की नमाज अदा की गई। शहर के अलग-अलग मोहल्लों में नमाज का समय अलग-अलग निर्धारित था, जिससे कहीं भी अफरा-तफरी का माहौल नहीं बना।

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